पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री रास्तों में रुकावट के कारण भारत में एलपीजी सप्लाई प्रभावित हो गई है। भारत अपनी बड़ी जरूरत खाड़ी देशों से पूरी करता है, लेकिन हालात बिगड़ने के बाद अब वहां से सप्लाई कम हो गई है। इससे देश में गैस की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है।
आयात में आई भारी गिरावट
ताजा आंकड़ों के अनुसार, 13 से 19 मार्च के बीच भारत का कुल एलपीजी आयात घटकर 2.65 लाख टन रह गया है। इससे पहले यह 3.22 लाख टन के आसपास था। खास बात यह है कि पश्चिम एशिया से आने वाली सप्लाई घटकर सिर्फ 89,000 टन रह गई है, जो हाल के समय में सबसे कम स्तर माना जा रहा है।
अमेरिका से बढ़ी उम्मीद
सप्लाई में कमी के बाद भारत अब अमेरिका से ज्यादा गैस मंगा रहा है। जहां पहले अमेरिका से आयात लगभग शून्य था, वहीं अब यह बढ़कर 1.76 लाख टन हो गया है। सरकार और तेल कंपनियां अब अमेरिका से लगातार गैस मंगाने की कोशिश कर रही हैं ताकि देश में कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सके।
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कितने दिन चलेगी यह गैस
भारत की सालाना गैस खपत बहुत ज्यादा है और रोजाना करीब 85,750 टन एलपीजी की जरूरत पड़ती है। ऐसे में अमेरिका से आई 1.76 लाख टन गैस सिर्फ लगभग 2 दिन की जरूरत ही पूरी कर सकती है। अगर पूरे साल में 2.2 मिलियन टन गैस भी अमेरिका से मिलती है, तब भी यह करीब 25 दिन की जरूरत ही पूरी कर पाएगी।
दूरी बनी बड़ी चुनौती
अमेरिका से गैस मंगाना आसान नहीं है। खाड़ी देशों से जहाज 7 से 8 दिन में पहुंच जाते हैं, लेकिन अमेरिका से आने में करीब 45 दिन लगते हैं। लंबी दूरी के कारण खर्च भी ज्यादा होता है और सप्लाई में देरी भी होती है, जिससे संकट और बढ़ सकता है।
आगे क्या होगा रास्ता
मौजूदा हालात बताते हैं कि सिर्फ अमेरिका पर निर्भर रहकर भारत अपनी गैस जरूरत पूरी नहीं कर सकता। सरकार को कई देशों से सप्लाई बढ़ानी होगी और घरेलू उत्पादन पर भी ध्यान देना होगा। फिलहाल राहत सीमित है और आने वाले दिनों में स्थिति कैसी रहेगी, यह पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय हालात पर निर्भर करेगा।