Indian Stock Market Rally : अमेरिका के मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने 4 नवंबर को एशियाई शेयर बाजारों में हलचल मचा दी। अमेरिकी संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत मिलने के बाद निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई, जिसका असर जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों पर दिखाई दिया। टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई। हालांकि, एशियाई बाजारों की इस कमजोरी के बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें कारोबारी दिन बढ़त के साथ बंद हुआ। इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में करीब 5.83 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।
जापान और कोरिया के बाजारों में भारी गिरावट
एशियाई बाजारों में सबसे ज्यादा दबाव जापान के शेयर बाजार पर देखने को मिला। निक्केई 225 इंडेक्स करीब 4.5 फीसदी तक गिर गया, जबकि टॉपिक्स में लगभग 2 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी कारोबार के दौरान करीब 4 फीसदी तक फिसल गया। ताइवान के शेयर बाजार में लगभग 3 फीसदी की गिरावट रही। वहीं, MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स करीब 2.3 फीसदी टूट गया। चीन के CSI 300 और हॉन्ग कॉन्ग के हैंग सेंग में अपेक्षाकृत मामूली कमजोरी देखने को मिली।
भारतीय बाजार में पांचवें दिन भी तेजी
जहां एशिया के प्रमुख बाजारों में बिकवाली हावी रही, वहीं भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में तेजी जारी रही। बुधवार को सेंसेक्स 383.55 अंक यानी 0.50 फीसदी चढ़कर 77,301.40 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी 149.75 अंक यानी 0.63 फीसदी की बढ़त के साथ 23,960.60 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में खरीदारी का माहौल बना रहा और निवेशकों को वैश्विक गिरावट के बावजूद राहत मिली।
निवेशकों की संपत्ति में 5.83 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी
शेयर बाजार की तेजी का सीधा फायदा निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा। 3 नवंबर को बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4,87,65,636.39 करोड़ रुपये था। 4 नवंबर को कारोबार खत्म होने पर यह बढ़कर 4,93,49,306.59 करोड़ रुपये हो गया। इस तरह एक कारोबारी दिन में निवेशकों की संपत्ति में 5,83,670.2 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
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सेमीकंडक्टर और टेक कंपनियों पर सबसे ज्यादा दबाव
एशियाई बाजारों में बिकवाली का सबसे बड़ा असर चिप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों पर पड़ा। जापान की कियोक्सिया होल्डिंग्स के शेयर 11 फीसदी से ज्यादा टूट गए। एडवांटेस्ट में करीब 8 फीसदी और टोक्यो इलेक्ट्रॉन में लगभग 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया में सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर करीब 2 फीसदी और एसके हीनिक्स के शेयर 3 फीसदी से अधिक फिसले। हॉन्ग कॉन्ग में हैंग सेंग टेक इंडेक्स भी करीब 1 फीसदी कमजोर रहा। अलीबाबा और शाओमी के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली।
डेमोक्रेटिक बहुमत से क्यों बढ़ी निवेशकों की चिंता
निवेशकों की चिंता की एक बड़ी वजह अमेरिकी संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत बताया जा रहा है। बाजार को आशंका है कि इससे एआई कंपनियों और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर सरकारी निगरानी तथा नियामकीय सख्ती बढ़ सकती है। एशिया की कई बड़ी टेक कंपनियों का कारोबार अमेरिकी एआई निवेश और चिप सप्लाई चेन से जुड़ा है। इसके अलावा निवेशक यह भी आकलन कर रहे हैं कि एआई कंपनियों में हो रहे भारी निवेश से भविष्य में उम्मीद के मुताबिक मुनाफा मिल पाएगा या नहीं।