
मई में भारत-पाक के बीच छिड़े युद्ध से दोनों देशों के बीच किसी ना किसी मंच पर तनाव की खबरें सामने आती रहती हैं. तो वहीं इस संघर्ष के बाद पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों ने नया मोड ले लिया है. अब इन दोनों देशों के रिश्ते मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं. इसके साथ ही कई मौकों पर शहबाज शरीफ को डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ में कसीदे पढ़ते देखा गया है. ट्रंप का मुनीर के साथ डिनर हो चुका है और इसके अलावा रेयर अर्थ वाली डील भी संपन्न हो गई है. पाकिस्तान को अब अपनी जी- हुजूरी का इनाम मिलने वाला है. बताया जा है कि अमेरिका जल्द ही AIM-120 एडवांस्ड मीडियम-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (AMRAAM) पाकिस्तान को देने वाला है.
अमेरिका के युद्ध विभाग की तरफ से एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है. जिसके अनुसार अमेरिका के इस हथियार सौदे में पाकिस्तान का नाम विदेशी सैन्य बिक्री प्राप्तकर्ताओं की सूची में शामिल है.
AIM-120D-3 मिसाइलें AMRAAM फैमिली का लेटेस्ट और हाई टेक संस्करण
AIM-120 AMRAAM एक एयर-टू-एयर मिसाइल है, जो कि दुश्मन के विमान को लंबी दूरी से निशाना बना सकती है. ये मिसाइल F-16 फाल्कन फाइटर जेट्स पर लगाई जाती है. 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान की वायुसेना ने भारत के साथ हवाई झड़पों के दौरान इसी का इस्तेमाल किया था. अभी पाकिस्तानी एयरफोर्स के पास इसका C5 वर्जन है, जबकि नया सौदा C8 और D3 वर्जन के उत्पादन के लिए किया गया है, जो कि अधिक रेंज और सटीकता वाले हैं. बता दें कि AIM-120D-3 मिसाइलें AMRAAM फैमिली का लेटेस्ट और हाई टेक संस्करण है. इन मिसाइलों को दुश्मन के फाइटर जेट और आने वाली मिसाइलों के खिलाफ दृश्य-सीमा से हटकर (बीवीआर) हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है.
लंबे समय से नई पीढ़ी के AMRAAM खरीदने की कोशिश में था पाक
रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि ये मिसाइल पाकिस्तान के मौजूदा F-16 बेड़े की ऑपरेशनल सीमा और सटीकता को और बढ़ाने का काम करेगी. इससे पाकिस्तान एयरफोर्स (पीएएफ) हवाई खतरों का बेहतर ढंग से जवाब देने में सक्षम हो जाएंगी. इसको लेकर पाकिस्तान लंबे समय से पुराने AIM-120C-5 वेरिएंट की जगह नई पीढ़ी के AMRAAM खरीदने की कोशिश में लगा था. पुराने AIM की डिलीवरी पाकिस्तान को 2010 में F-16 ब्लॉक 52 विमानों के साथ मिली थी. भारत के अपने हवाई बेड़े के आधुनिकीकरण करने और ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान में इन नई मिसाइलों को अपनी सैन्य ताकत में शामिल करने के लिए बेताब था.