ईरान के साथ जारी तनाव अब अमेरिका के लिए ही भारी पड़ता नजर आ रहा है। युद्ध के चलते वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर अमेरिकी बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ा है। हालात यह हैं कि गैसोलीन के दाम 2022 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।
अमेरिका में पेट्रोल कीमतों में उछाल
संयुक्त राज्य अमेरिका में गैसोलीन की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी देखी गई है। एक गैलन पेट्रोल की औसत कीमत 4 डॉलर से ऊपर पहुंच चुकी है, जो पिछले कुछ वर्षों का उच्चतम स्तर है। यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर युद्ध और तेल सप्लाई में बाधा से जुड़ी हुई मानी जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना संकट की जड़
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल सप्लाई का अहम रास्ता है, जहां से दुनिया की करीब 20% ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। ईरान के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में रुकावट के कारण तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाहाकार मचा हुआ है।
आम लोगों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
ईंधन महंगा होने का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। वाहन चलाना महंगा हो गया है, वहीं परिवहन लागत बढ़ने से रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो रही हैं। डीजल की कीमतों में भी भारी उछाल आया है, जिससे सप्लाई चेन पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों को प्रभावित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो कीमतों में और तेजी आ सकती है।
राजनीतिक रणनीति पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। जिस युद्ध को दबाव बनाने के लिए शुरू किया गया था, वही अब घरेलू महंगाई बढ़ाने का कारण बनता दिख रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है।