मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और बढ़ती तेल कीमतों के बीच Scott Bessent के बयान ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है। अमेरिका ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में आंशिक राहत देने पर विचार कर रहा है, ताकि सप्लाई बढ़ाकर कीमतों को काबू में लाया जा सके। दूसरी ओर Donald Trump ने सेना न भेजने की बात कही, लेकिन ईरान को कड़ी चेतावनी भी दी।
तेल संकट के बीच अमेरिका का नया प्लान
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति पर भारी असर पड़ा है। ऐसे में अमेरिका अब ईरान के उन तेल टैंकरों पर लगे प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रहा है, जो फिलहाल समुद्र में फंसे हुए हैं। यह कदम सीधे तौर पर बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से देखा जा रहा है।
फंसा हुआ तेल बनेगा राहत का जरिया
जानकारी के मुताबिक करीब 140 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल टैंकरों में अटका हुआ है। प्रतिबंधों के कारण इस तेल की खरीद नहीं हो पा रही है। यदि अमेरिका इन टैंकरों को राहत देता है, तो यह तेल ग्लोबल मार्केट में आ सकता है और सप्लाई बढ़ाकर कीमतों को नीचे ला सकता है।
होर्मुज संकट ने बढ़ाई मुश्किलें
Strait of Hormuz में तनाव और संभावित नाकाबंदी के कारण रोजाना 10-14 मिलियन बैरल तेल की कमी का खतरा पैदा हो गया है। यही वजह है कि अमेरिका अब वैकल्पिक रास्ते तलाश रहा है, ताकि ऊर्जा संकट को टाला जा सके।
ट्रंप का सख्त रुख, पर सेना नहीं भेजेंगे
राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ किया कि अमेरिका फिलहाल ईरान में सेना नहीं भेजेगा। हालांकि उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका दो मिनट में ईरान को खत्म कर सकता है। यह बयान कूटनीतिक दबाव के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत के लिए खुल सकते हैं नए रास्ते
भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए यह फैसला अहम साबित हो सकता है। अगर ईरानी तेल बाजार में लौटता है, तो भारत को सस्ते दाम पर तेल मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है और महंगाई पर भी असर पड़ेगा।