
अमेरिकी प्रतिबंधों के नए दौर ने रूस की बड़ी तेल कंपनियों की नींव हिला कर रख दी है. रूस की दूसरी सबसे बड़ी तेल कंपनी लुकोइल (Lukoil) ने ऐलान किया है कि वह अपनी अंतर्राष्ट्रीय संपत्तियां बेचने जा रही है. कंपनी द्वारा ये कदम अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद उठाया गया है. आपको बता दें कि फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से यह पहला मौका है, जब किसी रूसी कंपनी ने अपने विदेशी कारोबार को योजनाबद्ध तरीके से बेचने का फैसला लिया है.
“OFAC विंड डाउन लाइसेंस” द्वारा संपत्तियों की बिक्री
लुकोइल ने अपने बयान में कहा है कि उसकी संपत्तियों की बिक्री अमेरिकी “OFAC विंड डाउन लाइसेंस” के तहत की जाएगी. कंपनी ने ये भी साफ कर दिया है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह इस लाइसेंस के विस्तार के लिए आवेदन करेगी, ताकि संपत्तियों के सुचारू संचालन में कोई रुकावट न आए. फिलहाल संभावित खरीदारों से बोली प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है.
लुकोइल और रोसनेफ्ट दोनों अमेरिका के निशाने पर
दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों में लुकोइल और रूस की सबसे बड़ी तेल कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) दोनों को निशाने पर लिया गया है. ये कंपनियां रूस के लगभग 50% कच्चे तेल का उत्पादन करती हैं. 15 अक्टूबर को ब्रिटेन ने भी इन दोनों कंपनियों और 44 ‘शैडो टैंकरों’ को बैन किया, जिनके स्वामित्व की जानकारी अस्पष्ट थी. इसको लेकर ब्रिटेन ने कहा कि उसका उद्देश्य रूस को तेल से होने वाली कमाई को सीमित करना है, ताकि यूक्रेन युद्ध को आर्थिक रूप से कमजोर किया जा सके.
विदेशों में लुकोइल के पास कई महत्वपूर्ण संपत्तियां
वहीं लुकोइल के पास विदेशों में कई महत्वपूर्ण संपत्तियां हैं. इराक में स्थित वेस्ट कुर्ना-2 तेल क्षेत्र कंपनी की सबसे बड़ी विदेशी संपत्ति है, जिसमें इसकी 75% हिस्सेदारी है और जहां अप्रैल में उत्पादन 4.8 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक रहा. बुल्गारिया में कंपनी की नेफ्तोहिम बर्गास रिफाइनरी है, जिसकी क्षमता 1.9 लाख बैरल प्रतिदिन है. इसके अलावा रोमानिया में पेट्रोटेल रिफाइनरी और यूरोप के कई देशों में इसके टर्मिनल और रिटेल नेटवर्क हैं. हंगरी, स्लोवाकिया और तुर्की को भी यह कंपनी तेल की आपूर्ति करती है.
अमेरिकी और ब्रिटिश प्रतिबंधों का गहरा प्रभाव
अमेरिकी और ब्रिटिश प्रतिबंधों से लुकोइल और रोसनेफ्ट के व्यापार पर गहरा प्रभाव पड़ेगा. जिसके बाद अब इन कंपनियों से व्यापार करने वाली विदेशी कंपनियों को भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है. इसकी वजह से रूस की तेल बिक्री घटेगी और उसकी युद्ध मशीनरी को फंडिंग मिलना कठिन हो जाएगा. इसके साथ ही ये भी अनुमान लगाया जा रहा है कि रूस की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि उसका लगभग 40% बजट तेल और गैस की आय से आता है.
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रूस की सबसे बड़ी निजी तेल कंपनी है लुकोइल
लुकोइल रूस की सबसे बड़ी निजी तेल कंपनी है, जिसका मुख्यालय मॉस्को में है. यह 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद तीन सरकारी तेल इकाइयों लांगेपास, उरई और कोगालिम को मिलाकर बनाई गई थी. जो कि आज दुनिया की प्रमुख ऊर्जा कंपनियों में गिनी जाती है. कंपनी का दैनिक उत्पादन करीब 22 लाख बैरल है और इसके चार बड़े रिफाइनरी रूस में और तीन यूरोप में हैं. 100 से अधिक देशों में इसके पेट्रोल पंप नेटवर्क हैं. हालांकि साल 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद इसे NYSE से डीलिस्ट कर दिया गया था.