अमेरिका में एक बार फिर शटडाउन की स्थिति बन गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार सीनेट में फंडिंग बिल पास कराने में नाकाम रही, जिसके चलते कई सरकारी एजेंसियों को कामकाज रोकना पड़ा है। हजारों कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी पर भेजा जा सकता है, जबकि कुछ जरूरी सेवाओं में लगे कर्मचारियों को सैलरी के बिना भी काम करना पड़ेगा। इस शटडाउन ने जहां अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव डाला है, वहीं भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए यह हल्का सकारात्मक संकेत साबित हो सकता है।
क्यों हुआ शटडाउन?
शटडाउन की मुख्य वजह सरकारी खर्चों को लेकर सीनेट में सहमति न बन पाना है। ट्रंप की पार्टी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी सब्सिडी और मेडिकेड फंडिंग में कटौती चाहती है, जबकि विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। यही टकराव फंडिंग बिल पास न होने का कारण बना। अमेरिका में नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत 1 अक्टूबर से होती है, और फंडिंग मंजूरी न मिलने पर सरकारी कामकाज ठप हो जाता है।सरकारी कर्मचारियों पर असर शटडाउन के चलते लगभग 40 प्रतिशत सरकारी कर्मचारियों यानी करीब 8 लाख लोगों को बिना वेतन छुट्टी पर भेजा जा सकता है। वहीं, आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को सैलरी के बिना काम करना पड़ सकता है। नॉन-एसेंशियल सेवाएं पूरी तरह ठप हो जाती हैं और आम जनजीवन पर भी इसका असर देखने को मिलता है।
भारतीय शेयर बाजार पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह शटडाउन भारतीय शेयर बाजार पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं डालेगा। बल्कि अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी से भारत जैसे उभरते बाजारों को फायदा हो सकता है। निवेशक उन देशों में पैसा लगाना चाहेंगे, जो अमेरिकी शटडाउन से प्रभावित नहीं हैं। ऐसे में भारतीय बाजारों के लिए यह स्थिति थोड़ी पॉजिटिव हो सकती है।
क्या निकलेगा हल?
पिछली बार की तरह इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही कोई न कोई समझौता निकल आएगा। लंबे समय तक अमेरिकी सिस्टम ठप नहीं रह सकता। इसलिए यह शटडाउन अस्थायी साबित होगा और बाजार इस स्थिति को काफी हद तक नजरअंदाज करेंगे।