मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ समुद्री घेराबंदी को और सख्त कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के 8 तेल टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने के बाद भी आगे नहीं बढ़ पाए। अमेरिका की नौसेना ने इन जहाजों को ओमान की खाड़ी में रोक दिया और वापस लौटने को मजबूर किया।
कहां है ‘लक्ष्मण रेखा’
यह घेराबंदी सीधे होर्मुज जलडमरूमध्य में नहीं, बल्कि ओमान की खाड़ी में बनाई गई है। जैसे ही ईरान से जहाज निकलते हैं, अमेरिकी एजेंसियां सैटेलाइट और ड्रोन के जरिए उनकी निगरानी शुरू कर देती हैं। आगे बढ़ने पर युद्धपोत उन्हें इंटरसेप्ट कर लेते हैं। इस पूरी रणनीति को ‘पकड़ो और वापस भेजो’ मॉडल पर चलाया जा रहा है।
36 घंटे में बड़ा असर
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर ब्रैड कूपर ने दावा किया कि नाकाबंदी लागू होने के 36 घंटे के भीतर ही ईरान का समुद्री व्यापार लगभग ठप हो गया। उनका कहना है कि ईरान की करीब 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर निर्भर है, ऐसे में इस कार्रवाई का सीधा असर उसकी आर्थिक गतिविधियों पर पड़ा है।
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ट्रंप का सख्त रुख
इस पूरे घटनाक्रम के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख दोहराया है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। साथ ही उन्होंने युद्धविराम बढ़ाने के संकेत भी नहीं दिए, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
समुद्री रास्तों पर नजर
होर्मुज और ओमान की खाड़ी दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में गिने जाते हैं। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और व्यापारिक जहाज गुजरते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ी सैन्य गतिविधियां वैश्विक व्यापार को भी प्रभावित कर सकती हैं।
तनाव का असर वैश्विक बाजार पर
इस स्थिति का असर सिर्फ ईरान या अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। तेल की सप्लाई प्रभावित होने से कीमतों में उछाल आ सकता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
आगे क्या होगा
फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। अमेरिका की सख्त कार्रवाई और ईरान की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में हालात को और जटिल बना सकती है। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या यह टकराव आगे और बढ़ेगा या कूटनीति के जरिए कोई समाधान निकलेगा।