ईरान संघर्ष के दौरान अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने भारतीय महासागर में ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार है जब अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो का इस्तेमाल करके दुश्मन का युद्धपोत नष्ट किया। वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। यह हमला ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान हुआ। ये ईरान की मिसाइल और नौसैनिक क्षमताओं को निशाना बनाने के लिए अमेरिकी नेतृत्व वाली अभियान है।
जहाज टॉरपीडो हमले से डूबा
पेंटागन प्रेस ब्रीफिंग में वार सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि यह हमला अमेरिकी नौसैनिक शक्ति की पहुंच को दर्शाता है। उन्होंने कहा, वास्तव में, कल भारतीय महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जिसे लगा कि वह अंतरराष्ट्रीय जल में सुरक्षित है। यह जहाज टॉरपीडो हमले से डूबा, यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार हुआ।”
युद्धपोत समुद्र की गहराई में चला गया
संयुक्त सैन्य प्रमुख, एयर फ़ोर्स जनरल डैन केन ने भी इस हमले की पुष्टि की और इसे एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण नौसैनिक अभियान बताया। केन ने कहा, 1945 के बाद पहली बार, अमेरिकी नौसेना की एक फास्ट-अटैक पनडुब्बी ने एक ही मार्क 48 टॉरपीडो का इस्तेमाल कर दुश्मन के युद्धपोत को तुरंत प्रभाव से डुबो दिया, और वह युद्धपोत समुद्र की गहराई में चला गया।
पेंटागन के अनुसार, ईरानी जहाज उस समय मुख्य युद्ध क्षेत्र से बाहर था जब इसे निशाना बनाया गया। केन ने कहा कि यह हमला दिखाता है कि अमेरिकी सेनाएं दुश्मन जहाजों को मुख्य युद्ध क्षेत्र से दूर भी ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा, “दूर के क्षेत्र में तैनात दुश्मन को ढूंढना और उसे नष्ट करना केवल अमेरिका ही इस पैमाने पर कर सकता है।”
20 से अधिक ईरानी नौसैनिक जहाज नष्ट किए
यह कार्रवाई ईरान की नौसैनिक शक्ति को कमजोर करने वाले व्यापक अभियान का हिस्सा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अब तक संघर्ष के दौरान 20 से अधिक ईरानी नौसैनिक जहाज नष्ट किए जा चुके हैं। केन ने कहा, हम ईरानी नौसेना को नष्ट कर रहे हैं, उसकी क्षमता और संचालन शक्ति को कम कर रहे हैं।
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