अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने कड़े टैरिफ फैसलों के लिए जाने जाते रहे हैं। लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने उनके सबसे ताकतवर आर्थिक हथियार पर रोक लगा दी है। अदालत ने साफ किया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट के तहत राष्ट्रपति मनमाने तरीके से भारी टैरिफ नहीं लगा सकते। इस फैसले के बाद अब ट्रंप रातों-रात किसी देश पर बड़ा टैक्स नहीं थोप पाएंगे।
कैसे काम करता था पुराना तरीका
पहले ट्रंप इसी कानून के जरिए 10 से 50 प्रतिशत तक का टैरिफ अचानक लगा देते थे। कई बार इसका मकसद आर्थिक से ज्यादा राजनीतिक माना गया। चीन, यूरोप और दूसरे देशों के साथ टकराव में यह हथियार इस्तेमाल हुआ। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब यह रास्ता काफी हद तक बंद हो गया है।
150 दिन का नया प्लान
अदालत के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 का सहारा लिया है। इसके तहत 150 दिनों तक अधिकतम 15 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाया जा सकता है। फिलहाल 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लागू करने की बात सामने आई है। यह कदम अस्थायी माना जा रहा है, ताकि जब तक नया कानूनी रास्ता तय न हो जाए, तब तक दबाव बना रहे।
ये भी पढ़ें : India-Brazil Trade Deal पर हुए हस्ताक्षर, 20 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य, आतंकवाद और टेक्नोलॉजी पर साथ चलने का बड़ा संदेश
सेक्शन 232 और 301 पर फोकस
अब ट्रंप की रणनीति दो दूसरे कानूनों पर टिकती दिख रही है। पहला है सेक्शन 232, जिसके तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कुछ खास सेक्टर पर टैक्स लगाया जा सकता है। दूसरा और ज्यादा असरदार कानून है सेक्शन 301। इसके तहत किसी खास देश पर उसके व्यापार व्यवहार के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।
आसान नहीं होगा नया रास्ता
सेक्शन 301 के तहत टैरिफ लगाने के लिए लंबी जांच प्रक्रिया जरूरी है। सरकार को सबूत देने होंगे कि संबंधित देश अनुचित व्यापार कर रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में कई महीने, कभी-कभी एक साल तक लग सकता है। यानी अब कोई भी बड़ा टैरिफ फैसला तुरंत नहीं लिया जा सकेगा।
दुनिया पर क्या होगा असर
इस बदलाव से अंतरराष्ट्रीय कारोबारियों को थोड़ी राहत मिली है। अचानक लगने वाले टैक्स का डर कम होगा और बाजार में कुछ स्थिरता आ सकती है। हालांकि ट्रंप के पास अभी भी कानूनी हथियार मौजूद हैं, लेकिन अब हर कदम नियमों और जांच के दायरे में होगा। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि अमेरिका की नई व्यापार नीति दुनिया की अर्थव्यवस्था को किस दिशा में ले जाती है।