
अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के बावजूद भारत ने अपने निर्यात को बनाए रखने के लिए एक चतुर रणनीति को अपनाया है। भारतीय जहाजों ने अमेरिकी बाजारों के बजाय चीन की ओर रुख किया है। इससे उन्हें अपने उत्पादों को बेचने में सहायता मिल रही है। इस बदलाव के कारण भारत ने चीन को अपने निर्यात में 22% की बढ़ोतरी दर्ज की। ये अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच 8.41 अरब डॉलर तक पहुंच गई। वहीं बीते वर्ष के समान अवधि में यह आंकड़ा 6.90 अरब डॉलर था।
भारत की रणनीति के पीछे ये है वजह
भारत ने अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाने का प्रयास कर रहा है। इससे वह किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा। चीन ने भारतीय उत्पादों को खरीदने में रुचि दिखाई। इससे भारत को अपने निर्यात को बढ़ाने में सहायता मिली है। अमेरिकी टैरिफ की वजह से भारतीय उत्पादों के दाम अमेरिकी बाजार में बढ़ गए। चीन में ऐसा नहीं था।
भारत में ये हैं संभावनाएं
भारत को चीन जैसे नए बाजारों में अपने उत्पादों को बेचने का अवसर मिल सकेगा। भारत अपने निर्यात को विविध बनाने में सफल हो सकता है। इससे वह किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा। भारत को अपने निर्यात में वृद्धि से आर्थिक लाभ भी हो सकता है।
ये है सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों की मानें तो अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच भारत ने चीन को 8.41 अरब डॉलर के सामान निर्यात किए। ये बीते साल की समान अवधि में 6.90 अरब डॉलर थे. यह करीब 22 प्रतिशत की बड़ी उछाल माना जा रहा है। खास बात है कि अगस्त में अमेरिका की ओर से बढ़े टैरिफ के बाद सितंबर 2025 में चीन को निर्यात में 34 प्रतिशत की उछाल देखी गई है। ये 1.09 अरब डॉलर से बढ़कर 1.47 अरब डॉलर तक है।