
विश्व प्रसिद्ध बनारसी साड़ी और सिल्क उद्योग पर अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए टैरिफ का गहरा असर पड़ है। टैरिफ लागू होने के बाद अमेरिका से बड़े ऑर्डर पर रोक लगी है। विदेशी व्यापारियों ने माल वापस करना शुरू कर दिया है। वाराणसी वस्त्र उद्योग संगठन के अनुसाऱ, अगर स्थिति बनी तो शहर को सालाना 300 करोड़ रुपए तक का नुकसान हो सकता है। इस संकट ने हजारों कारीगरों की आजीविका को खतरे में डाला। उद्योग में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी का खतरा मंडरा रहा है।
बनारसी वस्त्र उद्योग एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजन बहल के अनुसार, टैरिफ के कारण बनारसी साड़ी के निर्यात में 15 से 20 प्रतिशत की कमी आई। हैंडलूम उत्पादों का निर्यात सबसे अधिक प्रभावित होगा। अभी नुकसान कम दिख सकता है, लेकिन भविष्य में इसका असर ज्यादा हो सकता है। अमेरिका में हर वर्ष 200 से 300 करोड़ रुपए का माल निर्यात होता था।ये अब खतरे में है। ऑर्डर रद्द हो रहे हैं. नए ऑर्डर की उम्मीद नहीं है। यह कोई छोटा नुकसान नहीं है, यह बनारस और यहां के उद्योग को लेकर बड़ा नुकसान है। ऑर्डर लगातार कैंसिल हो रहे हैं। हमें आगे ऑर्डर मिलने की उम्मीद नहीं है।
उन्होंने कहा कि हैंडलूम की संख्या लगातार गिर रही है। टैरिफ का असर इसे और कम करेगा। सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग करता है। इस तरह से उद्योग को बचाया जा सके। वहीं स्थानीय साड़ी व्यापारियों ने कहा, टैरिफ का हमारे व्यापार पर असर पड़ा है। 10 लाख रुपये का माल हाल ही में वापस आया गया है। रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है। तैयार माल को रोक दिया गया है। पेमेंट भी अटका हुआ है.
उन्होंने आगे बताया कि पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे व्यापारी अब टैरिफ की मार से दबाव में हैं। सरकार से हैंडलूम और हस्तशिल्प को जीएसटी से मुक्त करने की मांग की। उन्होंने कहा, हैंडलूम और हस्तशिल्प पर 5 प्रतिशत जीएसटी हटने से उद्योग को राहत मिली है। इससे घरेलू बाजार में मांग बढ़ेगी और मध्यम वर्ग फिर से बनारसी साड़ियों की ओर आकर्षित होगा।
उद्योग में नया उछाल आ सकता है
उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि जीएसटी में छूट से उद्योग में नया उछाल आ सकता है। इससे बुनकरों और व्यापारियों को हौसला बढ़ेगा। टैरिफ के कारण उत्पन्न संकट ने न केवल आर्थिक नुकसान हुआ है। हजारों कारीगरों के परिवारों की आजीविका को खतरा है। सरकार को तुरंत इस मामले में दखल देना चाहिए।