मध्य पूर्व में अमेरिका ने अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाकर 50 हजार से ज्यादा कर दी है। यह आम दिनों के मुकाबले करीब 10 हजार अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक नए मरीन और नौसैनिकों की तैनाती से इलाके में अमेरिकी मौजूदगी और मजबूत हो गई है, जिससे हालात और तनावपूर्ण बन गए हैं।
हमले की तैयारी या दबाव की रणनीति
जानकारी के अनुसार 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के करीब 2000 पैराट्रूपर्स को भी ऐसे स्थानों पर तैनात किया गया है जहां से जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। माना जा रहा है कि यह तैयारी किसी बड़े ऑपरेशन या दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
रणनीतिक जगहों पर नजर
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिका की नजर ईरान के अहम इलाकों पर है, खासकर खार्ग द्वीप जैसे स्थानों पर, जहां से तेल का बड़ा निर्यात होता है। ऐसे इलाकों पर नियंत्रण पाने की योजना से ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर डाला जा सकता है।
होर्मुज जलमार्ग बना सबसे बड़ी चिंता
होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय सबसे बड़ा रणनीतिक केंद्र बना हुआ है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से गुजरता है, लेकिन मौजूदा हालात में यह मार्ग काफी हद तक प्रभावित हुआ है। इसे दोबारा सुरक्षित करना अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
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विशेषज्ञों की चेतावनी
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान जैसे बड़े देश पर नियंत्रण पाने के लिए 50 हजार सैनिक पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में अगर कोई बड़ा ऑपरेशन होता है तो संघर्ष लंबा खिंच सकता है और इसके गंभीर वैश्विक असर देखने को मिल सकते हैं।
कूटनीति और अनिश्चितता बरकरार
हालांकि पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देशों के जरिए बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह तैयारियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन हालात यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में स्थिति और बदल सकती है।