टी20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के स्पिनर उस्मान तारिक की गेंदबाजी शैली को लेकर विवाद छिड़ गया है। कुछ लोग उनके एक्शन को अवैध बता रहे हैं, तो कुछ इसे पूरी तरह नियमों के दायरे में मान रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट एक्सपर्ट्स तक इस मुद्दे पर बहस तेज है। भारत के पूर्व खिलाड़ी भी दो हिस्सों में बंटे नजर आ रहे हैं।
रुककर गेंद फेंकना बना चर्चा का कारण
तारिक गेंद छोड़ने से ठीक पहले हल्का सा ठहरते हैं और फिर डिलीवरी करते हैं। यही बात बल्लेबाजों को असहज कर रही है। कई लोगों का मानना है कि उनका हाथ पूरी तरह सीधा नहीं रहता और इसमें ‘चकिंग’ हो सकती है। हालांकि कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने कहा है कि गेंद डालने से पहले रुकना नियमों के खिलाफ नहीं है। असली फैसला तो जांच के बाद ही होगा।
आईसीसी का नियम क्या कहता है?
आईसीसी के नियम साफ बताते हैं कि अगर कोई गेंदबाज गेंद फेंकता है यानी हाथ को गलत तरीके से झटका देता है, तो वह अवैध माना जाता है। खास तौर पर अगर गेंद छोड़ते समय कोहनी 15 डिग्री से ज्यादा सीधी होती है, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाता है। यह सीमा सभी गेंदबाजों पर समान रूप से लागू होती है।
मैच में कैसे होता है फैसला?
अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में अंपायर और मैच रेफरी रियल टाइम में गेंदबाज का एक्शन देखते हैं। अगर उन्हें शक होता है कि गेंदबाज का एक्शन सही नहीं है, तो वे आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज करते हैं। यह रिपोर्ट आगे जांच की प्रक्रिया शुरू करती है।
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टेस्टिंग सेंटर में होती है जांच
रिपोर्ट के बाद गेंदबाज को आईसीसी के मान्यता प्राप्त टेस्टिंग सेंटर में भेजा जाता है। वहां हाई-टेक कैमरों और सेंसर की मदद से एक्शन की बारीकी से जांच होती है। अगर पाया जाता है कि कोहनी की मोड़ सीमा से ज्यादा है, तो गेंदबाज पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
सुधार के बाद ही वापसी
अगर एक्शन अवैध पाया जाता है, तो खिलाड़ी को अपना एक्शन सुधारना पड़ता है। सुधार के बाद दोबारा टेस्ट होता है। जब तक वह नियमों के अनुसार सही साबित नहीं होता, तब तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में गेंदबाजी नहीं कर सकता। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि उस्मान तारिक का एक्शन जांच में क्या परिणाम देता है।