UP News: यूपी की कला, संस्कृति ने साल 2025 में बड़ा मुकाम हासिल किया। एक तरफ जहां राज्य सरकार ने प्रदेश की सांस्कृति विरासत को वैश्विक पहचान दिलाई, वहीं दूसरी तरफ फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने कई उपलब्धियां हासिल कीं। बदलते दौर में यूपी फिल्मों की शूटिंग के लिए आकर्षक स्पॉट बना। काशी, प्रयाग और अयोध्या में हुए धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों ने पूरी दुनिया को आकर्षित किया।
सांस्कृतिक आयोजनों का विस्तार
साल 2025 में उत्तर प्रदेश ने सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से संपूर्ण विश्व में अपनी पहचान नए सिरे से स्थापित की। काशी, अयोध्या और प्रयागराज सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बने और विश्व पटल पर छा गए। सबसे पहले काशी की बात करें, तो ‘काशी-तमिल संगमम-4.0’ ने देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाले बड़ा आयोजन बना। केंद्र और राज्य सरकार के प्रयास से यह आयोजन उत्तर और दक्षिण भारत की संस्कृतियों, परंपरा, भाषा, खान-पान को एक सूत्र में बांधने का काम किया।
25 नवंबर 2025 को धर्म ध्वजा फहराई गई
अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मस्थली पूरे संसार में आस्था का केंद्र बिंदु बनकर उभरी। श्रीराम मंदिर में 25 नवंबर 2025 को धर्म ध्वजा फहराई गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने धर्मध्वजा फहरायी। श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की धरती पर यह दूसरा सबसे बड़ा आयोजन रहा।प्रयागराज में संपन्न हुआ ‘महाकुंभ’ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक और आर्थिक पुनर्जागरण का नया अध्याय साबित हुआ। उत्तर प्रदेश ने दुनिया को दिखाया कि कैसे आस्था और प्रशासन का संतुलन मिलकर नए भारत की तस्वीर गढ़ता है। 'प्रयागराज महाकुंभ-2025' में 66 करोड़ से अधिक लोग शामिल हुए, जो विश्व रिकॉर्ड बना। इस महाकुंभ में कल्पवासी, साधु-संतों और दुनिया भर से सनातन धर्मावलंबी शामिल हुए। ‘महाकुंभ-2025’ ने यह भी दिखाया कि कैसे एक धार्मिक आयोजन सामाजिक एकता और समावेश की भावना को सशक्त कर सकता है। यह सफल आयोजन भारत की धार्मिक आस्था को और मजबूत करने वाला साबित हुआ।
सिनेमा को मिला विस्तार
साल 2025 फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी खास रहा। उत्तर प्रदेश फिल्म निर्माण का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा। प्रदेश की फिल्म निर्माण नीति के कारण यह संभव हो सका। शूटिंग की अनुमति, सब्सिडी और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक सहयोग प्रदान किया गया। लखनऊ, वाराणसी, बुंदेलखंड, चित्रकूट, प्रयागराज आदि शहरों में कई फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग की गई।
वाराणसी की संस्कृति पर बनाया गया
फिल्म बनारस विभीषिका को वाराणसी की संस्कृति पर बनाया गया। अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी, मालिक, इन गलियों में, पति-पत्नी और वो दो, तेरे इश्क में, अखंडा, मिर्जापुर जैसी फिल्मों और वेब-सीरीज को उत्तर प्रदेश के विभिन्न लोकेशन पर शूट किया गया। लखनऊ, वाराणसी, बुंदेलखंड आदि क्षेत्र फिल्म निर्माताओं के लिए मनपसंद स्थल बने। प्रदेश की मांग सिनेमा में तब से बढ़ी है, जबसे फिल्मों में उत्तर भारतीयों और खासकर दबंग घरानों को दिखाने की परंपरा शुरू हुई। अधिकतर फिल्में या वेब-सीरीज जैसे मिर्जापुर, बुलेट राजा आदि की शूटिंग उत्तर प्रदेश में की गई। यहां के लोकेशन और यहां की बोली को दिखाने के लिए इस तरह का प्रयोग किया गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार की फिल्म नीति, सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम ने बड़ी भूमिका निभाई है। सरकार के प्रयास से प्रदेश में फिल्म निर्माण को बढ़ावा मिला। युवाओं को रोजगार मिला।
कलाकारों को मिली राष्ट्रीय पहचान
विदेश तक संगीत को पहुंचाने वाले बनारस घराने के प्रसिद्ध कलाकार और सरोद वादक पंडित अंशुमान महाराज कहते हैं, कि उत्तर प्रदेश न सिर्फ धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से हरा-भरा है, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी यह धन धान्य है। यहां के कलाकारों ने देश ही नहीं विदेश तक ख्याति पाई है। साल 2025 में काशी, प्रयागराज और अयोध्या में हुए बड़े धार्मिक आयोजनों में प्रदेश ही नहीं देश भर के कलाकारों को एक मंच प्रदान किया।