उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 15 जनवरी को पूरे प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। यह फैसला मकर संक्रांति पर्व को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी के बजाय 15 जनवरी को मनाई जा रही है। इसी कारण राज्य सरकार ने स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तरों में अवकाश की घोषणा की है, ताकि लोग धार्मिक और सामाजिक परंपराओं को सहज रूप से निभा सकें।
इस बार तारीख क्यों बदली
आमतौर पर मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाती है, लेकिन खगोलीय गणना के अनुसार इस वर्ष सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 15 जनवरी को हो रहा है। इसी वजह से इस बार पर्व की तिथि बदली गई है। सरकार का कहना है कि पर्व की वास्तविक तिथि पर ही अवकाश देना उचित है, जिससे श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के पर्व मना सकें।
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पवित्र पर्व माना जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है। इसे सूर्य के उत्तरायण होने की शुरुआत माना जाता है। मान्यता है कि इसके बाद दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। धार्मिक दृष्टि से यह काल बेहद शुभ माना जाता है।
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सर्दी के अंत और बसंत का संकेत
मकर संक्रांति को सर्दियों के अंत और बसंत ऋतु के आगमन का संकेत भी माना जाता है। इस दिन से मौसम में धीरे-धीरे बदलाव आने लगता है। लोग इस पर्व को नई ऊर्जा और नए उत्साह के साथ मनाते हैं। यही कारण है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है।
किसानों के लिए खास त्योहार
मकर संक्रांति किसानों के लिए भी बेहद खास मानी जाती है। यह रबी फसल के पकने और कटाई के समय का प्रतीक है। गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलों की मेहनत रंग लाने लगती है। इस दिन किसान नई फसल के लिए भगवान का आभार व्यक्त करते हैं और आने वाले समय के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।
दान, स्नान और उत्सव की परंपरा
इस दिन गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य देव की पूजा और दान का विशेष महत्व होता है। तिल और गुड़ का दान पुण्यदायी माना जाता है। कई जगह पतंगबाजी होती है और घरों में खिचड़ी बनाई जाती है। इन्हीं परंपराओं को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने 15 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है, ताकि लोग पूरे उत्साह से पर्व मना सकें।