उत्तराखंड में हरिद्वार नगर निगम की भूमि खरीद से जुड़ा मामला अब बड़े प्रशासनिक एक्शन में बदलता नजर आ रहा है। सरकारी जांच में कई गंभीर सवाल सामने आने के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। एक आईएएस अधिकारी की सेवा समाप्ति की संस्तुति, दो वरिष्ठ अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई और कई कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू होने से प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
जमीन खरीद के फैसले ने खड़े किए सवाल
यह मामला उस भूमि खरीद से जुड़ा है जिसमें करीब 14 करोड़ रुपये मूल्य की बताई जा रही जमीन को लगभग 54 करोड़ रुपये में खरीदे जाने को लेकर सवाल उठे। मामला सामने आने के बाद इस खरीद प्रक्रिया के आधार, जरूरत और प्रशासनिक मंजूरियों को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो गई। इसके बाद पूरे मामले की जांच कराई गई।
विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद बढ़ी कार्रवाई
जांच के दौरान दस्तावेजों, फाइलों और संबंधित अधिकारियों के बयानों की गहन समीक्षा की गई। विस्तृत रिपोर्ट में कई ऐसे बिंदु सामने आए जिन्होंने पूरी प्रक्रिया को संदेह के घेरे में ला दिया। रिपोर्ट के आधार पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया गया।
प्रक्रिया में कई स्तरों पर अनियमितता के संकेत
जांच में पाया गया कि भूमि मूल्यांकन और अंतिम खरीद प्रक्रिया के बीच कई सवाल खड़े करने वाली स्थितियां सामने आईं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि जरूरी प्रक्रियाओं और अनुमोदन के कुछ चरण अपेक्षित तरीके से पूरे नहीं किए गए। कुछ प्रशासनिक प्रक्रियाओं के असामान्य रूप से तेजी से निपटने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
भूमि चयन पर भी उठे कई सवाल
रिपोर्ट में जमीन के चयन को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गई हैं। जांच के दौरान यह सवाल भी सामने आया कि जिस भूमि को खरीदा गया, उसकी तत्काल आवश्यकता क्या थी और क्या अन्य विकल्पों पर विचार किया गया था। इन बिंदुओं पर आगे भी जांच जारी रहने की संभावना बताई जा रही है।
अब केंद्र स्तर पर होगी अगली प्रक्रिया
चूंकि मामला अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों से जुड़ा है, इसलिए आगे की प्रक्रिया में केंद्र स्तर की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य सरकार द्वारा संबंधित प्रस्ताव आगे भेजे जाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी धन के उपयोग को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।