
उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में बादल फटने के बाद हालात बहुत खराब हो गए हैं. वहां अब सिर्फ मलबा और तबाही का मंजर दिख रहा है. कई घर और होटल पानी के तेज बहाव में बह गए हैं. सरकारी एजेंसियां लगातार राहत और बचाव कार्य में लगी हैं, लेकिन बड़ी समस्या यह है कि भारी मलबे और टूटे रास्तों की वजह से मशीनें मौके तक नहीं पहुंच पा रही हैं.
कारोबारी जय भगवान की आपबीती
धराली में होटल चलाने वाले जय भगवान का 40 कमरों वाला बड़ा होटल इस बाढ़ में पूरी तरह बह गया. जय भगवान उस वक्त स्थानीय मंदिर में ‘नाग देवता मेला’ में शामिल हो रहे थे. तभी उन्होंने लोगों की चीख-पुकार सुनी. जय भगवान बताते हैं, “पास के गांव से लोग चिल्ला रहे थे, उन्होंने सीटी बजाई लेकिन हमें कुछ समझ नहीं आया. अचानक कीचड़, पत्थर और पानी का सैलाब आ गया और पूरा गांव तबाह हो गया.”
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घर तक आ गया सैलाब
जब जय भगवान को हालात का अंदाज़ा हुआ, तब वो अपने घर की तरफ भागे, लेकिन सिर्फ 20 मिनट में पानी उनके घर तक पहुंच गया. फिर वो पैदल ही हर्षिल गांव की तरफ निकल पड़े. बाद में जब उन्होंने घटना के वीडियो देखे, तो उनका खुद का होटल पानी में बहता हुआ नजर आया.
किस्मत से बचे कई लोग
जय भगवान कहते हैं कि आमतौर पर चारधाम यात्रा के वक्त उनका होटल पूरी तरह भरा होता है. लेकिन जिस दिन ये हादसा हुआ, उस दिन वहां बहुत कम लोग थे. उनके होटल में कोई कर्मचारी नहीं था और भतीजा जो मैनेजमेंट देखता है वो भी मौजूद नहीं था इससे कई जानें बच गईं.
रेस्क्यू टीम को भारी मुश्किल
रेस्क्यू में लगे कर्मचारियों का कहना है कि करीब 50 से 60 फीट ऊंचा मलबा और कीचड़ जमा हो गया है जिसे हटाने में काफी वक्त लगेगा. इस हादसे में अभी तक करीब 70 लोग लापता हैं और उन्हें खोजने का काम जारी है.
धराली में आए इस भयंकर सैलाब ने गांव को तबाह कर दिया है. जय भगवान जैसे लोग तो बाल-बाल बच गए, लेकिन कई परिवारों का सब कुछ इस बाढ़ में बह गया है. अब राहत कार्य और पुनर्निर्माण ही आगे की चुनौती है.