Vaibhav Suryavanshi Record : दलीप ट्रॉफी 2026 के सेमीफाइनल में एक बार फिर 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने अपनी बल्लेबाजी से सबका ध्यान खींच लिया। ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए वैभव ने सेंट्रल जोन के खिलाफ 81 गेंदों में 92 रन की शानदार पारी खेली। इस दौरान उनके बल्ले से 7 चौके और 7 छक्के निकले। हालांकि वह शतक से सिर्फ 8 रन दूर रह गए, लेकिन उनकी यह पारी मैच की सबसे बड़ी चर्चा बन गई।
इतिहास में दर्ज हुआ नाम
वैभव सूर्यवंशी ने इस मुकाबले में सिर्फ रन ही नहीं बनाए, बल्कि एक बड़ा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। 15 साल 157 दिन की उम्र में उन्होंने दलीप ट्रॉफी के इतिहास का सबसे युवा अर्धशतक लगाने वाला बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड लक्ष्मण सिंह के नाम था, जिन्होंने 16 साल 23 दिन की उम्र में अर्धशतक लगाया था। वैभव अब इस टूर्नामेंट में 16 साल से कम उम्र में फिफ्टी लगाने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं।
42 गेंदों में पूरी की फिफ्टी
वैभव ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज दिखाया। उन्होंने यश ठाकुर के खिलाफ शुरुआती ओवरों में शानदार शॉट लगाए और तेजी से रन जुटाए। पारी के 15वें ओवर में स्पिनर सारांश जैन की गेंद पर छक्का लगाकर उन्होंने सिर्फ 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। इसके बाद भी उन्होंने हमला जारी रखा और सेंट्रल जोन के गेंदबाजों को लगातार दबाव में रखा।
जीवनदान के बाद बदला मैच का रुख
वैभव को 40 रन के निजी स्कोर पर एक बड़ा जीवनदान मिला। यश राठौड़ ने उनका आसान कैच छोड़ दिया। इसके बाद युवा बल्लेबाज ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने हर खराब गेंद का फायदा उठाया और तेजी से स्कोर आगे बढ़ाया। उनकी बल्लेबाजी के कारण ईस्ट जोन मजबूत स्थिति में पहुंच गया और विपक्षी टीम पर दबाव बढ़ता गया।
कप्तानी में भी दिखाया कमाल
इस मुकाबले में वैभव सिर्फ बल्लेबाजी के कारण ही चर्चा में नहीं रहे। मैच के पहले दिन ईशान किशन के चोटिल होने के बाद उन्होंने ईस्ट जोन की कप्तानी भी संभाली थी। कप्तानी के दौरान उनका एक डीआरएस फैसला भी काफी चर्चित रहा, जो बिल्कुल सही साबित हुआ। इससे उनकी क्रिकेट समझ की भी जमकर तारीफ हुई।
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शतक से चूके, लेकिन जीत लिया दिल
वैभव सूर्यवंशी का पहला फर्स्ट क्लास शतक बनने की उम्मीद थी, लेकिन हर्ष दुबे की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में वह 92 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बावजूद उनकी यह पारी यादगार बन गई। कम उम्र में जिस आत्मविश्वास और आक्रामकता के साथ उन्होंने बल्लेबाजी की, उसने साफ कर दिया कि भारतीय क्रिकेट को भविष्य का एक बड़ा सितारा मिल चुका है। अब क्रिकेट फैंस की नजरें वैभव के अगले मुकाबलों पर टिकी हुई हैं।