भारत के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 मैच में तूफानी अर्धशतक लगाकर कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए। लेकिन उनकी बल्लेबाजी से ज्यादा चर्चा मैच के बाद दिए गए उनके बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, कोच और अपने संघर्ष के दिनों में साथ देने वालों को दिया।
18 गेंदों में अर्धशतक, बना दिया नया रिकॉर्ड
जिम्बाब्वे के खिलाफ 126 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने सिर्फ 18 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने 19 गेंदों में 50 रन की पारी खेली, जिसमें चार चौके और चार छक्के शामिल रहे। इस प्रदर्शन के साथ वह पुरुष अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए।
कई दिग्गजों को छोड़ा पीछे
इस पारी के साथ वैभव ने सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक लगाने के मामले में सचिन तेंदुलकर, शाहिद अफरीदी, मुश्ताक मोहम्मद और मोहम्मद अशरफुल जैसे कई चर्चित खिलाड़ियों के रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए। उनकी इस उपलब्धि की क्रिकेट जगत में खूब चर्चा हो रही है।
सफलता का श्रेय परिवार और कोच को दिया
मैच के बाद वैभव ने कहा कि यह पारी उनके माता-पिता, कोच और उन सभी लोगों को समर्पित है जिन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ दिया। उन्होंने बताया कि उनका एक सेलिब्रेशन अपनी मां के लिए था, जबकि दूसरा टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी रिंकू सिंह से मिली सलाह से प्रेरित था।
रिकॉर्ड से ज्यादा टीम के लिए खेलना है लक्ष्य
वैभव ने कहा कि वह इस उपलब्धि को अपने सिर पर नहीं चढ़ने देंगे। उनके अनुसार, रिकॉर्ड बनाना खुशी की बात है, लेकिन सबसे बड़ी जिम्मेदारी हर मैच में भारत के लिए अच्छा प्रदर्शन करना है। उन्होंने कहा कि अभी उन्हें बहुत कुछ सीखना और हासिल करना बाकी है।
टीम इंडिया को मिला भविष्य का नया सितारा
युवा बल्लेबाज के इस प्रदर्शन ने भारतीय टीम को भविष्य के लिए एक मजबूत विकल्प दिया है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में वैभव ने जिस आत्मविश्वास और तकनीक का परिचय दिया है, वह उन्हें आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट का अहम खिलाड़ी बना सकता है।
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बल्ले के साथ व्यवहार की भी हो रही तारीफ
वैभव सूर्यवंशी की पारी ने जितनी सुर्खियां बटोरीं, उतनी ही उनके विनम्र स्वभाव और सोच की भी चर्चा हो रही है। रिकॉर्ड बनाने के बाद भी उन्होंने व्यक्तिगत उपलब्धि से ज्यादा टीम, परिवार और अपने गुरुओं को महत्व दिया। यही कारण है कि उनकी बल्लेबाजी के साथ-साथ उनके व्यवहार और संस्कार की भी क्रिकेट जगत में सराहना हो रही है।