आईपीएल 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी क्रिकेट जगत के सबसे चर्चित नामों में शामिल हो गए हैं। राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उन्होंने पूरे सीजन में बेहतरीन बल्लेबाजी की और सबसे ज्यादा रन बनाकर ऑरेंज कैप अपने नाम की। इसके साथ ही उन्हें मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर का सम्मान भी मिला। इस प्रदर्शन के बाद उनकी ब्रांड वैल्यू में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला और कई कंपनियों की नजर उन पर टिक गई।
फीस बढ़ी, लेकिन विज्ञापन कम क्यों?
वैभव सूर्यवंशी की लोकप्रियता बढ़ने के साथ उनकी एंडोर्समेंट फीस में भी बड़ा इजाफा हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी प्रति डील फीस अब करोड़ों रुपये तक पहुंच गई है। इसके बावजूद वे अभी तक बड़े पैमाने पर विज्ञापनों में नजर नहीं आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण उनकी उम्र मानी जा रही है। महज 15 साल की उम्र में उन्हें कई ऐसे ब्रांड्स के लिए साइन नहीं किया जा सकता, जिनकी मार्केटिंग रणनीति वयस्क उपभोक्ताओं पर आधारित होती है।
नियमों की वजह से सीमित विकल्प
भारत में विज्ञापन से जुड़े नियम और दिशानिर्देश कई श्रेणियों के उत्पादों के लिए नाबालिगों को ब्रांड एंबेसडर बनाने पर सीमाएं लगाते हैं। ग्रूमिंग उत्पाद, लग्जरी लाइफस्टाइल ब्रांड, फाइनेंस सेवाएं, क्रेडिट कार्ड और निवेश से जुड़े कई उत्पाद आमतौर पर वयस्क ग्राहकों को ध्यान में रखकर प्रचारित किए जाते हैं। ऐसे में कंपनियां कानूनी और नैतिक कारणों से नाबालिग खिलाड़ियों को इन अभियानों का चेहरा बनाने से बचती हैं।
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परिवार और मैनेजमेंट की सोच भी अहम
वैभव के करियर को लेकर उनका परिवार और टीम भी काफी सतर्क नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि फिलहाल उनका फोकस क्रिकेट पर बनाए रखने के लिए उन्हें जरूरत से ज्यादा विज्ञापन और मीडिया गतिविधियों से दूर रखा जा रहा है। प्रबंधन की रणनीति है कि कम उम्र में अत्यधिक व्यावसायिक दबाव खिलाड़ी के विकास को प्रभावित न करे। इसी वजह से चुनिंदा और उम्र के अनुरूप ब्रांड्स के साथ ही साझेदारी की जा रही है।
लंबी पारी खेलने की तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी के सामने आने वाले वर्षों में विज्ञापन जगत के बड़े अवसर खुल सकते हैं। फिलहाल कंपनियां उनके साथ छोटे और सीमित अवधि के समझौतों को प्राथमिकता दे रही हैं। परिवार और मैनेजमेंट की कोशिश है कि वे धीरे-धीरे अपनी पहचान मजबूत करें और खेल में निरंतर सफलता हासिल करें। यही वजह है कि फिलहाल ब्रांडिंग से ज्यादा ध्यान उनके क्रिकेट करियर को स्थायी और सफल बनाने पर दिया जा रहा है।