Vaibhav Red Ball Training : टी20 क्रिकेट में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी अब रेड बॉल क्रिकेट में खुद को साबित करने की तैयारी कर रहे हैं। 23 अगस्त से शुरू होने वाली दलीप ट्रॉफी उनके लिए अगली बड़ी चुनौती है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी बल्लेबाजी और सोच दोनों में बदलाव पर काम शुरू किया है।
बचपन के कोच को बुलाया नागपुर
रेड बॉल क्रिकेट की तैयारी के लिए वैभव ने अपने बचपन के कोच मनीष ओझा को पटना से नागपुर बुलाया। राजस्थान रॉयल्स की अकादमी में करीब छह दिनों तक दोनों ने साथ काम किया। इस दौरान फोकस सिर्फ तकनीक पर नहीं बल्कि लंबे समय तक बल्लेबाजी करने की मानसिकता तैयार करने पर रहा।
सेशन-दर-सेशन बल्लेबाजी का मंत्र
कोच मनीष ओझा ने वैभव को समझाया कि चार और पांच दिन के क्रिकेट में बल्लेबाजी को अलग-अलग हिस्सों में बांटना पड़ता है। लंच से पहले, लंच के बाद और दिन के आखिरी सत्र में किस तरह खेलना है, इस पर विशेष अभ्यास कराया गया। लक्ष्य सिर्फ रन बनाना नहीं बल्कि लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहना था।
अच्छी गेंद का सम्मान जरूरी
टी20 में जहां हर गेंद पर रन बनाने का दबाव रहता है, वहीं रेड बॉल क्रिकेट में धैर्य सबसे बड़ी ताकत होती है। ओझा ने वैभव को समझाया कि अपने स्वाभाविक शॉट्स छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन सही गेंद का इंतजार करना सीखना होगा। अच्छी गेंद को सम्मान देना और खराब गेंद पर आक्रमण करना ही सफलता की कुंजी है।
स्टार बनने के बाद भी नहीं बदले
जिम्बाब्वे दौरे पर शानदार प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने के बाद भी वैभव के व्यवहार में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। उनके कोच का कहना है कि 15 साल की उम्र में मिली सफलता के बावजूद वह आज भी वही सहज और सीखने को तैयार खिलाड़ी हैं, जो बचपन में अकादमी में अभ्यास किया करते थे।
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कोच का बड़ा दावा
मनीष ओझा का मानना है कि अगर वैभव रेड बॉल क्रिकेट में धैर्य के साथ 90 ओवर तक बल्लेबाजी करने में सफल हो जाते हैं, तो उनके पास तिहरा शतक लगाने की क्षमता भी है। दलीप ट्रॉफी में अब सभी की नजरें इस युवा बल्लेबाज पर होंगी कि क्या वह टी20 की विस्फोटक छवि के साथ-साथ लंबी पारी खेलने की कला भी दिखा पाते हैं।