आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 की ट्रॉफी एक बार फिर भारत के नाम हो गई है। फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने इंग्लैंड को 100 रनों से हराकर खिताब अपने नाम किया। यह भारत का छठा अंडर-19 विश्व कप खिताब है। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने 411 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया, जो फाइनल मुकाबलों के इतिहास में सबसे बड़े स्कोरों में गिना जा रहा है।
वैभव सूर्यवंशी की ऐतिहासिक पारी
इस जीत के सबसे बड़े हीरो रहे 14 साल के ओपनर वैभव सूर्यवंशी। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में 80 गेंदों पर 175 रन की विस्फोटक पारी खेली। इस दौरान उनके बल्ले से 15 चौके और 15 छक्के निकले। वैभव ने सिर्फ 32 गेंदों में अर्धशतक और 55 गेंदों में शतक पूरा कर दिया। यह पारी अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में अब तक की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी बन गई।
समस्तीपुर में जश्न का माहौल
वैभव की इस ऐतिहासिक पारी के बाद बिहार के समस्तीपुर जिले में उनके घर पर जश्न देखने को मिला। ताजपुर स्थित उनके आवास पर सैकड़ों ग्रामीण जमा हुए। मिठाइयां बांटी गईं और जमकर आतिशबाजी हुई। पिता संजीव सूर्यवंशी ने कहा कि बेटे का देश के लिए खेलना और जीत दिलाना परिवार ही नहीं, पूरे गांव के लिए गर्व की बात है। उन्होंने इसे नए दौर की शुरुआत बताया।
कोच ने मेहनत को बताया सफलता की वजह
वैभव के बचपन के कोच बृजेश झा ने कहा कि इतने बड़े मंच पर ऐसा प्रदर्शन करना आसान नहीं होता। उन्होंने बताया कि वैभव में सीखने की गजब की क्षमता है और उसने हर स्तर पर खुद को बेहतर किया है। कोच के मुताबिक, लगातार मेहनत और सही मार्गदर्शन का ही नतीजा है कि वैभव आज देश ही नहीं, दुनिया में नाम कमा रहा है।
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रिकॉर्ड्स की लाइन लगा दी
वैभव सूर्यवंशी की 175 रन की पारी ने कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। उन्होंने 2012 के फाइनल में बनाए गए 111 रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही वह अंडर-19 वर्ल्ड कप के एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज भी बन गए। टूर्नामेंट में उनके नाम कुल 30 छक्के दर्ज हुए, जिनमें से 15 सिर्फ फाइनल में आए।
भारतीय क्रिकेट का नया सितारा
महज 14 साल की उम्र में ऐसा प्रदर्शन यह साफ करता है कि वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट का उभरता हुआ सितारा हैं। इससे पहले भी उन्होंने घरेलू और युवा क्रिकेट में दमदार पारियां खेली हैं। वर्ल्ड कप फाइनल की यह पारी न सिर्फ भारत की जीत की नींव बनी, बल्कि आने वाले समय के लिए भारतीय क्रिकेट को एक नई उम्मीद भी दे गई।