देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, जो पश्चिम बंगाल के हावड़ा से असम के कामाख्या तक चलती है, अब अपने खाने के मेन्यू को लेकर चर्चा में है। अभी तक इस ट्रेन में यात्रियों को केवल शाकाहारी भोजन ही परोसा जा रहा था। लेकिन अब रेलवे ने बड़ा फैसला लेते हुए इसमें मांसाहारी भोजन शामिल करने की तैयारी कर ली है। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, यात्रियों की मांग और क्षेत्रीय खानपान की आदतों को देखते हुए यह बदलाव जल्द लागू किया जाएगा।
अब तक क्यों मिल रहा था सिर्फ शाकाहारी खाना
इस वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का उद्घाटन 17 जनवरी को किया गया था और 22 जनवरी से इसकी नियमित सेवा शुरू हुई। शुरुआत से ही इसमें केवल वेज भोजन दिया जा रहा था। इसी बात को लेकर ट्रेन शुरू होने से पहले ही सियासी विवाद खड़ा हो गया था। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि बंगाल और असम जैसे राज्यों की खानपान संस्कृति को नजरअंदाज किया गया है, जहां मछली और मांस रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा हैं।
रेल मंत्री तक पहुंचा मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मुद्दे पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने सीधे रेल मंत्री से बात की। उन्होंने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में मांसाहारी भोजन का विकल्प शुरू करने की मांग रखी। रेल मंत्री ने इस पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए भरोसा दिलाया कि यात्रियों को जल्द ही नॉन-वेज खाने का विकल्प मिलेगा। बताया गया कि अगले कुछ दिनों में इसकी औपचारिक जानकारी भी जारी कर दी जाएगी।
रेलवे की पुष्टि, जल्द शुरू होगा नॉन-वेज मेन्यू
रेलवे की ओर से भी अब साफ कर दिया गया है कि इस ट्रेन में मांसाहारी व्यंजन परोसे जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन नई है और सभी सुविधाएं एक साथ शुरू करना संभव नहीं था। धीरे-धीरे यात्रियों की जरूरत और प्रतिक्रिया के आधार पर सेवाओं में सुधार किया जा रहा है। रेलवे का मानना है कि इससे यात्रियों की संतुष्टि बढ़ेगी और सफर का अनुभव और बेहतर होगा।
बंगाल और असम की खानपान परंपरा
बंगाल और असम दोनों ही राज्यों में मांसाहारी भोजन की गहरी परंपरा है। मछली, मांस और अंडा यहां के आम खाने में शामिल हैं। लोग रोजाना इन्हें खाते हैं और इन्हें संस्कृति का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में लंबी दूरी की ट्रेन में नॉन-वेज विकल्प न होना कई यात्रियों को खटक रहा था।
धार्मिक यात्रियों के लिए भी अहम फैसला
कामाख्या मंदिर और काली मंदिरों में मांस और मछली चढ़ाने की परंपरा रही है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मांसाहारी भोजन वर्जित नहीं है। ऐसे में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में नॉन-वेज खाने की सुविधा शुरू होना धार्मिक यात्रियों के लिए भी राहत की खबर है। कुल मिलाकर, यह फैसला यात्रियों की पसंद और क्षेत्रीय संस्कृति के सम्मान की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।