भारत ने वो ऐतिहासिक पल देख लिया, जब राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के पूरे 150 साल पूरे हुए. जैसे ही ये दिन आया, देश का हर कोना देशभक्ति की लहर से भर उठा. स्कूलों में बच्चे गूंजते सुरों में वंदे मातरम् गाते दिखे, सरकारी कार्यक्रमों में इसकी गूंज सुनाई दी और सोशल मीडिया पर मानो राष्ट्रभक्ति की बारिश हो गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में सालभर चलने वाले राष्ट्रीय स्मरणोत्सव की शुरुआत की और इसे भारत की आत्मा का गीत बताया. उधर, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा वंदे मातरम् सिर्फ गीत नहीं, कर्तव्य का आह्वान है. ये महोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की विरासत, भावनाओं और मातृभूमि के सम्मान का प्रतीक बन गया है.
मोदी बोले-यह गीत मंत्र है, ऊर्जा है, संकल्प है
कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने स्मारक डाक टिकट और स्मृति सिक्का जारी किया. उन्होंने कहा वंदे मातरम् सिर्फ शब्द नहीं, एक मंत्र है जो हर भारतीय को इतिहास की याद दिलाता है, वर्तमान में आत्मविश्वास भरता है और भविष्य के लिए नया हौसला देता है. मोदी ने ये भी जोर दिया कि भारत के स्वतंत्रता संघर्ष का इतिहास वंदे मातरम् के बिना अधूरा है और ये गीत देश की सामूहिक चेतना को जगाने वाला शक्तिशाली प्रतीक है.
योगी ने याद दिलाया जब गूंजता था गीत
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम् वो गीत है, जिसे क्रांतिकारी फांसी के तख्ते पर चढ़ते समय भी गुनगुनाते थे. इसमें न जाति है, न धर्म ये भारत की एकता और राष्ट्रीय भावना का स्वर है. इसी वजह से इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया. योगी ने कहा कि आज जब 150 साल पूरे हो रहे हैं, तो यह मौका केवल जश्न का नहीं, बल्कि देश के प्रति कर्तव्य निभाने का संकल्प लेने का भी है.
कब लिखा गया वंदे मातरम् ?
वंदे मातरम् को 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था. 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध कर कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार गाया और पूरा देश जोश से भर उठा. उस दौर में अंग्रेजों के खिलाफ राष्ट्रवाद उभर रहा था और वंदे मातरम् आंदोलन की आवाज बन गया. अंग्रेजों को इस गीत से इतना डर लगता था कि कई बार इस पर पाबंदी तक लगा दी गई. 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय गीत घोषित किया. ‘वंदे’ का अर्थ नमन करना, ‘मातरम्’ यानी मां. “मां, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूं”यही भाव इसे हर भारतीय के दिल का गीत बना देता है.
आज 150 साल बाद भी वही ऊर्जा, वही जोश लेकर खड़ा है
स्कूलों में स्पेशल कार्यक्रम, राज्यों में आयोजन, नेताओं का संदेश और सोशल मीडिया पर उमड़ती देशभक्ति की लहर… यह बताती है कि वंदे मातरम् आज भी उतना ही जीवंत है जितना आजादी के आंदोलन के दौरान था. 150 साल बाद भी यह गीत भारत के अतीत की शान, वर्तमान का जोश और भविष्य की प्रेरणा बना हुआ है