Vande Mataram: लोकसभा में वंदे मातरम् को लेकर हुई विशेष चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि राष्ट्रीय गीत सिर्फ गाने भर के लिए नहीं, बल्कि उसकी भावना को आचरण में लाना भी आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में कई मुद्दों पर श्रेय लेने की प्रतियोगिता चल रही है। अखिलेश ने कहा कि देश की एकता और सौहार्द को बनाए रखने के लिए वंदे मातरम् की भावना को राजनीति से ऊपर उठकर समझने की जरूरत है। वहीं, चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की, जिन्होंने वंदे मातरम् के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका का उल्लेख किया।
अखिलेश का बयान और आरोप
अखिलेश यादव ने सत्ता पक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वंदे मातरम् किसी एक दल या विचारधारा का नहीं, बल्कि पूरे देश का है। उन्होंने कहा कि इसे दिखावे या राजनीति का विषय बनाना उचित नहीं है और इसकी मूल भावना को समझना चाहिए। सपा नेता ने उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों के एकीकरण का मुद्दा भी उठाया और दावा किया कि कई स्कूल बंद हुए हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वंदे मातरम् पर राजनीति करने से समाज में दूरी पैदा होती है, जिसे खत्म किया जाना चाहिए।
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पीएम मोदी का ऐतिहासिक संदर्भ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चर्चा में कहा कि वंदे मातरम् स्वतंत्रता संग्राम का प्राण मंत्र रहा है और देश को जोड़ने की शक्ति रखता है। प्रधानमंत्री ने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए मुस्लिम लीग के दबाव में राष्ट्रीय गीत को लेकर समझौता किया गया, जिसका लंबे समय तक प्रभाव रहा। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान भी जब लोकतंत्र पर दबाव बना, तब वंदे मातरम् ने लोगों में नई ऊर्जा का संचार किया था। प्रधानमंत्री ने संदेश दिया कि राष्ट्रीय गीत को किसी भी तरह के राजनीतिक विवाद से ऊपर रखा जाना चाहिए।