संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को राज्यसभा वंदे मातरम् की बहस को लेकर गर्मा गई। सोमवार को लोकसभा में उठी बहस का असर आज उच्च सदन में दिखा, जहां गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे आमने-सामने नज़र आए। अमित शाह ने वंदे मातरम् को स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बताया, वहीं खड़गे ने कहा कि कांग्रेस ने 60 साल पहले से इसे सम्मान दिया है और ‘अब जो लोग इसे नहीं गाते थे, वे भी शुरुआत कर रहे हैं।’
राज्यसभा में बहस की शुरुआत, शाह ने रखा सरकार का पक्ष
मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह ने वंदे मातरम् पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि देश की संस्कृति, त्याग और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आजादी के दौर में इस गीत ने देश को एकजुट किया और अंग्रेजों के अत्याचारों के बीच नई चेतना का संचार किया। शाह बोले कि आज यह चर्चा इसलिए ज़रूरी है ताकि नई पीढ़ी इसकी महत्ता समझ सके।
खड़गे का पलटवार—‘मैं 60 साल से गा रहा हूं वंदे मातरम्’
चर्चा में हिस्सा लेते हुए विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अमित शाह के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने स्वतंत्रता संग्राम के समय वंदे मातरम् को जन-जन तक पहुंचाया था। खड़गे ने तंज कसते हुए कहा, “मैं 60 साल से वंदे मातरम् गा रहा हूं, जिन्होंने इसे नहीं गाया, वे अब शुरुआत कर रहे हैं।” उन्होंने बंकिमचंद्र और स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया।
नेहरू, तुष्टिकरण और इतिहास पर तीखी बहस
अमित शाह ने चर्चा के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति के कारण वंदे मातरम् के टुकड़े किए गए और उत्सवों को दबाया गया। इस बयान पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई और सदन में हंगामा हुआ। शाह ने दावा किया कि कांग्रेस नेतृत्व में वंदे मातरम् का विरोध आज तक जारी है।
‘अंग्रेजों के दौर में कोड़े खाते थे लोग’—शाह
गृह मंत्री ने कहा कि अंग्रेजी शासनकाल में वंदे मातरम् बोलने वालों पर अत्याचार किए जाते थे, फिर भी यह गीत कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैल गया। उन्होंने बताया कि इस गीत ने भारतीयों के मन में आजादी का जोश जगाया और यह स्वतंत्रता आंदोलन का उद्घोष बन गया। शाह ने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि मातृभूमि की महिमा प्राचीन ग्रंथों में भी स्थापित है।
‘वंदे मातरम् पर चर्चा हमेशा ज़रूरी’—सरकार का रुख
सरकार ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् पर चर्चा किसी चुनाव या राजनीति से जुड़ी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की समझ बढ़ाने के लिए है। अमित शाह ने कहा कि यह गीत भारत की आत्मा है और आने वाली पीढ़ियों को इसके योगदान से परिचित कराना आवश्यक है। उन्होंने आशा जताई कि यह बहस युवाओं में राष्ट्रभक्ति और गौरव की भावना को मजबूत करेगी।