संसद का शीतकालीन सत्र इन दिनों बेहद गर्म है। एक तरफ SIR और BLO की मौतों पर सवाल उठ रहे हैं, दूसरी ओर इंडिगो संकट और प्रदूषण पर विपक्ष सरकार को घेर रहा है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा की शुरुआत कर सत्र का माहौल पूरी तरह बदल दिया। पीएम ने इसे ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि आज सदन उस विषय पर चर्चा कर रहा है, जिसने आज़ादी की लड़ाई में जनता की चेतना जगाई थी। पीएम के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई, अखिलेश यादव और अनुराग ठाकुर ने अपने पक्ष रखे। वहीं प्रियंका गांधी ने भी अपनी दलीलें देती हुई कहा कि वंदे मातरम् देश की साझा विरासत है।
राजनाथ सिंह का तीखा और भावनात्मक भाषण
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में अपने भाषण से माहौल और भी तीखा कर दिया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने वंदे मातरम् की 151वीं वर्षगांठ पूरे देश में मनाने का फैसला किया है और यह केवल प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं होगा। राजनाथ ने जोर देकर कहा कि वंदे मातरम् बंगाल तक सीमित नहीं था, यह भारत के हर कोने में गूंजता था और विदेशों तक इसकी आवाज पहुंची थी। उन्होंने कहा कि इसके असली महत्व को अब समझने और इसके भूले हुए पदों को पुनः पढ़ने का समय आ गया है। उनका दावा था कि वंदे मातरम् किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान की आवाज है।
नेहरू का जिक्र करके छेड़ दी नई बहस
राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में एक किताब का हवाला देते हुए पंडित नेहरू का संदर्भ भी दिया। उन्होंने कहा कि नेहरू ने एक बैठक में कहा था कि भारत को खतरा किसी विचारधारा से नहीं, बल्कि कट्टरता से है। राजनाथ ने यह कहते हुए हलचल तेज कर दी कि आज वही लोग संविधान के मूल्यों के अनुरूप काम कर रहे हैं जिन पर पहले शंका जताई जाती थी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग आज यह भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि जन गण मन और वंदे मातरम् को आमने-सामने खड़ा किया जा रहा है, जबकि ये दोनों मां भारती की दो आंखें हैं। उनके अनुसार जो लोग यह अंतर नहीं समझते, वे राष्ट्रभावना को भी नहीं समझते।
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वंदे मातरम् के साथ हुए ‘अन्याय’ की भरपाई का दावा
राजनाथ सिंह ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि वंदे मातरम् को वह सम्मान नहीं मिला जिसका वह हकदार था। उन्होंने कहा कि इसे जानबूझकर पीछे किया गया, जबकि आज़ादी के दौर में यह राष्ट्रीय चेतना का सबसे शक्तिशाली प्रतीक था। उन्होंने याद दिलाया कि 1906 में जब भारत का पहला राष्ट्रीय ध्वज बना, तब उसके मध्य में वंदे मातरम् लिखा था। अंग्रेजों ने इसके खिलाफ आदेश जारी किए, लेकिन जनता इसे अपने दिल से नहीं निकाल सकी। राजनाथ ने कहा कि अब समय आ गया है कि वंदे मातरम् की गरिमा को फिर से स्थापित किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ी भी इसके महत्व को समझ सके।