Varanasi Cricket Stadium : वाराणसी में बन रहा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम अपनी खास डिजाइन की वजह से पहले ही लोगों का ध्यान खींच रहा है। गंजारी में तैयार हो रहे इस स्टेडियम में क्रिकेट के साथ काशी की पहचान और भगवान शिव से जुड़े डिजाइन को भी जगह दी गई है। करीब 450 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह स्टेडियम 30 एकड़ से ज्यादा जमीन पर तैयार हो रहा है और इसमें करीब 30 हजार दर्शकों के बैठने की जगह होगी।
शिव की थीम ने बनाया इसे खास
वाराणसी का यह स्टेडियम बाकी क्रिकेट मैदानों से थोड़ा अलग होगा। इसके डिजाइन में भगवान शिव से जुड़े कई प्रतीकों को शामिल किया गया है। स्टेडियम की छत में अर्धचंद्र की झलक दिखाई देगी। वहीं, इसकी लाइटें त्रिशूल के आकार की बनाई गई हैं। प्रवेश वाले हिस्से में बेलपत्र से प्रेरित डिजाइन भी देखने को मिलेगा।
डमरू जैसा होगा खास हिस्सा
इस स्टेडियम की सबसे ज्यादा चर्चा डमरू जैसी डिजाइन को लेकर है। तस्वीरों में इसका अलग और आकर्षक रूप साफ नजर आता है। यही हिस्सा स्टेडियम को एक अलग पहचान देने वाला है। काशी में भगवान शिव से डमरू का खास जुड़ाव माना जाता है, इसलिए इसे स्टेडियम के डिजाइन का अहम हिस्सा बनाया गया है।
घाट जैसी दिखेगी दर्शक दीर्घा
स्टेडियम के अंदर दर्शकों के बैठने की व्यवस्था भी काशी के घाटों से प्रेरित रखी गई है। यानी यहां क्रिकेट देखने आने वाले लोगों को आधुनिक खेल सुविधाओं के साथ शहर की खास पहचान की झलक भी मिलेगी। इस तरह पूरा स्टेडियम सिर्फ खेल की जगह नहीं, बल्कि काशी की संस्कृति से जुड़ा हुआ नजर आएगा।
निर्माण का काम पहुंचा आखिरी दौर में
अगस्त 2026 की जानकारी के अनुसार स्टेडियम का ज्यादातर बड़ा काम पूरा हो चुका है। वीआईपी, दक्षिण, पश्चिम और पूर्व पवेलियन का काम पूरा बताया गया है। मीडिया सेंटर और अंदर के कई जरूरी काम भी पूरे हो चुके हैं। मैदान में घास लगाने का काम भी हो चुका है और बाहरी हिस्से का 80 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा बताया गया है।
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अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य
फिलहाल स्टेडियम के बचे हुए काम को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार डमरू से जुड़े बचे काम को 15 अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बाहरी विकास का बाकी काम भी सितंबर तक पूरा करने की बात कही गई है। अगर काम तय समय के अनुसार पूरा होता है, तो वाराणसी को जल्द ही एक ऐसा क्रिकेट मैदान मिल सकता है, जिसकी पहचान सिर्फ क्रिकेट से नहीं बल्कि काशी की खास संस्कृति से भी होगी।