वाराणसी के छितौना गांव में क्षत्रिय और राजभर समुदायों के बीच हुए विवाद के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं. इस मामले को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने मंगलवार को संदहा चौराहे पर महापंचायत बुलाने की घोषणा की थी, लेकिन पुलिस ने इसे बलपूर्वक रोक दिया. इस दौरान क्षत्रिय समाज और पुलिस के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई और माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया.
पुलिस ने की सख्ती
महापंचायत को विफल करने के लिए प्रशासन ने जिले की सीमाओं पर कड़ी चेकिंग शुरू कर दी थी. संदहा चौराहे की ओर आने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया गया था. इसके बावजूद क्षत्रिय समाज के सैकड़ों लोग वहां पहुंच गए. जब पुलिस ने उन्हें हटाने की कोशिश की तो भीड़ उग्र हो गई पुलिसकर्मियों के कई लोगों ने वर्दी के बिल्ले तक नोच लिए. माहौल बिगड़ता देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा जिससे भीड़ को तितर-बितर किया गया.
पुलिस ने अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह को चंदौली, राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर अवनीश को आजमगढ़ और ब्लॉक प्रमुख अभिषेक सिंह को छितौना में हाउस अरेस्ट कर लिया. वहीं पूर्व सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह के भी पहुंचने की चर्चा थी लेकिन वो नहीं आए.
क्या है पूरा मामला?
5 जुलाई को छितौना गांव में खेत में जानवर चले जाने को लेकर दो पक्षों के बीच झगड़ा हो गया था. एक पक्ष राजभर समुदाय से है, तो दूसरा क्षत्रिय समाज से. राजभर पक्ष ने मुकदमा दर्ज कराया जिसके बाद पुलिस ने क्षत्रिय पक्ष के दो युवकों अमित और अनुराग को जेल भेज दिया.
इस पर करणी सेना ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई श्रम मंत्री अनिल राजभर के दबाव में की गई. बाद में क्षत्रिय समाज की तरफ से भी मुकदमा दर्ज कराया गया. तभी से इस मुद्दे पर दोनों समुदायों में टकराव की स्थिति बनी हुई है.
लोगों की नाराजगी और प्रशासन का रवैया
महापंचायत में शामिल होने पहुंचे लोगों का आरोप था कि प्रशासन ने राजभर समुदाय का पक्ष लेते हुए क्षत्रिय समाज के साथ एकतरफा कार्रवाई की. यही वजह रही कि लोगों ने हाईवे पर बैठकर जोरदार नारेबाजी की. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन देकर लोगों को शांत किया.
छितौना में लगाया गया शांति का संदेश
छितौना गांव के लोगों ने गांव में बैनर लगाए हैं जिनमें लिखा गया है कि "कृपया कोई भी बाहरी व्यक्ति यहां आकर राजनीतिक माहौल न बनाए." इसके अलावा राजभर पक्ष की ओर से भी एक वीडियो जारी किया गया, जिसमें शांति बनाए रखने की अपील की गई थी.
प्रशासन की ओर से कड़ी निगरानी
माहौल बिगड़ने से रोकने के लिए डीआईजी शिवहरी मीणा, डीसीपी प्रमोद कुमार, एडीएम सिटी, एसडीएम सदर और कई थानों की पुलिस साथ ही PAC और RAF के जवान मौके पर तैनात किए गए थे. छितौना गांव और उसके आस-पास के इलाकों में धारा 163 (पूर्व में 144) लगाई गई थी.
लेकिन यह मामला अभी भी गर्म है और प्रशासन की सख्ती और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों के बीच लोग निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं.