Varanasi Ropeway Fare : वाराणसी में शुरू होने जा रही देश की पहली अर्बन रोपवे सेवा को लेकर लोगों का इंतजार अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। रोपवे का संचालन शुरू होने से पहले इसके किराए की जानकारी सामने आ गई है। कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया के बीच सफर करने वाले यात्रियों को दूरी के हिसाब से 10 रुपये से 50 रुपये तक का टिकट लेना होगा। इससे शहर के लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
देश की पहली अर्बन रोपवे सेवा
वाराणसी का यह रोपवे प्रोजेक्ट देश की पहली अर्बन रोपवे सेवा माना जा रहा है। इसका मकसद शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक पर ट्रैफिक का दबाव कम करना है। रोजाना हजारों लोग कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया और आसपास के इलाकों में आते-जाते हैं। ऐसे में रोपवे शुरू होने के बाद सफर पहले की तुलना में ज्यादा आसान और तेज हो सकता है।
दीवाली के आसपास मिल सकती है सौगात
जानकारी के अनुसार प्रशासन का लक्ष्य इस रोपवे सेवा को दीवाली के आसपास शुरू करने का है। हालांकि अभी इसकी अंतिम तारीख घोषित नहीं की गई है। यदि तय समय के अनुसार नवंबर 2026 तक सेवा शुरू हो जाती है तो वाराणसी के लोगों को एक नया और आधुनिक परिवहन विकल्प मिल जाएगा। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
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इन स्टेशनों से होकर गुजरेगा रोपवे
रोपवे का रूट कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक बनाया गया है। इस मार्ग पर कई प्रमुख स्टेशन भी होंगे, जिससे यात्रियों को बीच रास्ते में उतरने और चढ़ने की सुविधा मिलेगी। इस रूट में कैंट, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया स्टेशन शामिल हैं। इन इलाकों में रोजाना बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है।
पास धारकों को मिलेगा खास फायदा
रोपवे सेवा का एक बड़ा आकर्षण यह भी है कि नियमित यात्रियों के लिए पास की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। पास लेने वाले यात्रियों को टिकट किराए में करीब 30 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है। इससे रोजाना सफर करने वाले लोगों का खर्च कम होगा और वे इस सुविधा का ज्यादा उपयोग कर सकेंगे।
ट्रैफिक जाम से मिल सकती है राहत
कैंट से गोदौलिया तक का इलाका वाराणसी के सबसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां अक्सर लंबा जाम देखने को मिलता है। रोपवे शुरू होने के बाद यात्रियों की बड़ी संख्या सड़क की बजाय हवाई मार्ग से सफर कर सकेगी। इससे ट्रैफिक दबाव कम होने की उम्मीद है और लोगों का समय भी बचेगा। यही वजह है कि इस परियोजना को वाराणसी की परिवहन व्यवस्था के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।