बनारस लोकोमोटिव वर्क (बनारस रेल इंजन कारखाना- बरेका) ने मेड इन इंडिया की पहचान को और विश्व पटेल पर परिलक्षित किया है। जिसकी तस्वीर विदेश से आने वाले लोकोमोटिव के ऑर्डर के रूप में देखी जा रही है। बरेका ने लोकोमोटिव निर्माण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की तकनीकी क्षमता का परचम लहराया है। 21 फरवरी को बरेका में तैयार 3300 हॉर्स पावर एसी-एसी डीजल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव इंजन मोजाम्बिक के लिए रवाना किया गया।
बरेका को समय-समय पर विदेश से लोकोमोटिव बनाने के ऑर्डर आते हैं। मोजाम्बिक के लिए 3300 हॉर्स पावर एसी-एसी डीजल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के कुल 10 इंजनों के निर्माण एवं निर्यात का ऑर्डर मिला था, जून 2025 से इंजन का निर्माण हो रहा था। समय-समय पर सभी लोकोमोटिवों का निर्माण कर उन्हें भेज दिया गया है। आज 10वां इंजन भी रवाना हो गया।
100 किमी की रफ्तार से चलेंगे
बरेका प्रशासन का कहना है कि यह उपलब्धि बरेका की ग्लोबल कॉम्पिटेटिव क्षमता और भारतीय रेल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय साख का महत्वपूर्ण की एक तस्वीर है। जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने बताया, यह निर्यात कार्यक्रम भारतीय रेलवे की उत्पादन दक्षता, तकनीकी विश्वसनीयता को बताता है। इस इंजन की बात करें तो यह अत्याधुनिक 3300 हॉर्स पावर केप गेज (1067 मिमी) लोकोमोटिव 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से संचालन में सक्षम हैं।
इन इंजनों में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधुनिक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिसमें उन्नत एसी–एसी ट्रैक्शन तकनीक, आधुनिक एवं एर्गोनॉमिक कैब डिज़ाइन शामिल हैं। जिसमें चालक सुविधा के लिए रेफ्रिजरेटर, हॉट प्लेट एवं मोबाइल होल्डर एवं सुरक्षित संचालन प्रणाली मौजूद है।
11 देश को 182 इंजन का कर चुका है निर्यात
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में बरेका अब लोकोमोटिव निर्माण के एक महत्वपूर्ण वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में उभर रहा है। स्वदेशी डिजाइन, उन्नत विनिर्माण क्षमता एवं आधुनिक रेलवे प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशेषज्ञता के बल पर वैश्विक रेलवे बाजार में भारत की उपस्थिति को सशक्त बना रहा है। अब तक बरेका 11 देशों को 182 लोकोमोटिव निर्यात कर चुका है, जिनमें, तंजानिया, वियतनाम, बांग्लादेश, श्रीलंका, मलेशिया, सूडान, अंगोला, म्यांमार, सेनेगल, माली तथा मोजाम्बिक शामिल हैं।