प्राचीन समय में राजा-महाराजाओं के महलों का निर्माण केवल भव्यता के लिए ही नहीं, बल्कि वास्तु सिद्धांतों को ध्यान में रखकर किया जाता था। महलों में एक विशेष स्थान ऐसा भी होता था जिसे ‘शांति कक्ष’ या ध्यान कक्ष माना जाता था। कहा जाता है कि इस स्थान पर कुछ समय बैठने से मन की अशांति कम होती थी और मानसिक संतुलन प्राप्त होता था। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में ऐसा स्थान बनाना आज भी सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
महलों में क्यों बनाया जाता था शांति कक्ष
पुराने समय में राजा-महाराजाओं को राज्य के कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने होते थे। ऐसे में मानसिक शांति और एकाग्रता बनाए रखना बेहद जरूरी होता था। इसलिए महलों में एक शांत और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर स्थान तैयार किया जाता था, जहां राजा कुछ समय अकेले बैठकर ध्यान या चिंतन कर सकें। माना जाता था कि इस जगह की ऊर्जा व्यक्ति के मन को स्थिर और शांत बनाने में मदद करती है।
वास्तु के अनुसार कैसी होनी चाहिए यह जगह
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में शांति या ध्यान के लिए सबसे उपयुक्त दिशा उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण मानी जाती है। यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र मानी जाती है। इस स्थान पर हल्के रंगों का उपयोग करना, साफ-सफाई बनाए रखना और प्राकृतिक रोशनी का प्रवेश होना बेहद शुभ माना जाता है। यहां भगवान की मूर्ति, दीपक या सुगंधित धूप भी रखी जा सकती है।
मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत
जब कोई व्यक्ति शांत वातावरण में कुछ समय बिताता है, तो उसका मन धीरे-धीरे स्थिर होने लगता है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार अगर घर में ध्यान या शांति के लिए अलग स्थान बनाया जाए और वहां रोज कुछ मिनट बैठकर ध्यान या प्रार्थना की जाए, तो तनाव कम होता है और मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं। इससे निर्णय लेने की क्षमता भी बेहतर होती है।
घर में ऐसे बनाएं अपना ‘शांति कोना’
अगर घर में अलग कमरा उपलब्ध न हो तो किसी शांत कोने को भी शांति स्थल के रूप में तैयार किया जा सकता है। वहां साफ-सफाई रखें, हल्की रोशनी और सुगंधित वातावरण बनाएं। रोजाना कुछ मिनट ध्यान, प्रार्थना या शांत बैठने की आदत डालें। वास्तु मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और व्यक्ति मानसिक रूप से अधिक शांत और संतुलित महसूस करता है।