Vat Savitri Vrat 2026: हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना से रखती हैं। मान्यता है कि माता सावित्री ने अपने तप और पतिव्रता धर्म से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पा लिए थे। इसी कारण यह व्रत वैवाहिक जीवन के लिए बेहद शुभ माना जाता है। साल 2026 में वट सावित्री व्रत को लेकर महिलाओं में खास उत्साह देखने को मिलेगा। ऐसे में पूजा का सही मुहूर्त और आवश्यक सामग्री जानना बेहद जरूरी है।
वट सावित्री व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त
वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत मई के अंतिम सप्ताह में पड़ने की संभावना है। सुबह स्नान के बाद शुभ मुहूर्त में वट वृक्ष की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाएगा। पूजा के दौरान महिलाएं वट वृक्ष के चारों ओर धागा बांधकर परिक्रमा करती हैं और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
पूजा सामग्री के बिना अधूरा माना जाता है व्रत
वट सावित्री व्रत की पूजा में कुछ सामग्री का विशेष महत्व होता है। पूजा की थाली में रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, फूल, भीगा हुआ चना, फल, धूप, दीपक, लाल धागा, मिठाई और जल से भरा कलश जरूर रखना चाहिए। इसके अलावा बरगद के पेड़ की पूजा के लिए कच्चा सूत और पंखा भी उपयोग में लाया जाता है। मान्यता है कि पूरी श्रद्धा से इन सामग्रियों के साथ पूजा करने से वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहता है।
इस विधि से करें वट वृक्ष की पूजा
व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। वट वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित करें और रोली-अक्षत चढ़ाएं। फिर सूत को पेड़ के चारों ओर लपेटते हुए परिक्रमा करें। पूजा के दौरान वट सावित्री व्रत कथा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। अंत में भगवान विष्णु और माता सावित्री की आरती करें।
व्रत से जुड़ी मान्यताएं और लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट सावित्री व्रत रखने से दांपत्य जीवन में प्रेम और विश्वास बढ़ता है। यह व्रत पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाने वाला माना जाता है। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखकर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
वट सावित्री व्रत के दिन क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। पूजा के समय साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखें। व्रत कथा सुने बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। साथ ही बरगद के वृक्ष को नुकसान पहुंचाने से भी बचना चाहिए। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है।