भोपाल। भारत की प्राचीन काल गणना प्रणाली अब आधुनिक रूप में हर किसी की कलाई और मोबाइल स्क्रीन पर दिखने जा रही है। एक सितंबर से वैदिक समय को वैश्विक स्तर पर डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध कराया जाएगा। खास बात यह है कि यह समय 189 से अधिक भाषाओं में देखा जा सकेगा। वैदिक समय के साथ पंचांग, तिथि, नक्षत्र, योग और त्यौहार संबंधी पूरी जानकारी भी उपयोगकर्ताओं को मिलेगी। इसे युवाओं से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम और संवाद भी होंगे।
वैदिक घड़ी और एप का लोकार्पण
राजधानी में आयोजित समारोह में वैदिक घड़ी और उसके एप का अनावरण किया जाएगा। इस मौके पर बाइक रैली और पैदल मार्च का भी आयोजन होगा। एप और घड़ी का उद्देश्य भारतीय काल गणना की प्राचीन पद्धति को आधुनिक स्वरूप में पुनर्जीवित करना है।
एप की विशेषताएं
एप में हजारों वर्षों का पंचांग समाहित है। इसमें श्रीकृष्ण जन्मकाल से लेकर महाभारत काल और 7000 से अधिक वर्षों की तिथियां और नक्षत्र मौजूद हैं। उपयोगकर्ताओं को व्रत-त्योहार, शुभ-अशुभ मुहूर्त और साधना संबंधी 30 प्रकार की जानकारी भी उपलब्ध होगी।
भारतीय संस्कृति का डिजिटल स्वरूप
यह पहल भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की कोशिश है। अब वैदिक घड़ी केवल समय बताने का साधन नहीं रहेगी, बल्कि यह भारतीय काल गणना की वैज्ञानिकता और गहराई से दुनिया को परिचित कराएगी।