
उपराष्ट्रपति चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों को बड़ी सफलता मिली है। एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने विपक्षी INDIA गठबंधन के साझा उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को 150 से ज्यादा मतों से हराकर जीत दर्ज की। राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी को 300 वोट हासिल हुए। इस दौरान 15 वोट अवैध पाए गए।
बीजेपी ने विपक्षी सांसदों का जताया आभार
चुनाव नतीजों के बाद भाजपा ने दावा किया कि विपक्षी गठबंधन के कई सांसदों ने क्रॉस वोटिंग की है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर लिखा- "एनडीए उम्मीदवार को वोट देने के लिए INDI अलायंस के कुछ सांसदों का विशेष धन्यवाद। शांत और कुशल व्यक्ति तथा सच्चे देशभक्त को चुनने के लिए सभी का आभार।"
इसी तरह केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि एनडीए को 25 अतिरिक्त वोट मिले हैं, जो इस बात का संकेत है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और नीतियों ने विपक्षी खेमे के सांसदों को भी प्रभावित किया।
ये भी पढ़ें : Paris बना रणभूमि, मैक्रों के फैसलों के खिलाफ विद्रोह, ‘ब्लॉक एव्रीथिंग’ मूवमेंट से सुलगी सड़कें
भाजपा का दावा: 40 सांसदों ने किया समर्थन
लोकसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक संजय जायसवाल ने कहा कि राधाकृष्णन को कुल 452 वोट मिले, जबकि एनडीए की अपनी संख्या और सहयोगी दलों को मिलाकर यह आंकड़ा 438 होना चाहिए था। इसका मतलब है कि कम से कम 14 वोट विपक्ष से आए। जायसवाल ने दावा किया कि लगभग 40 सांसदों ने अपनी “अंतरात्मा की आवाज” पर एनडीए उम्मीदवार को समर्थन दिया।
कौन कर गया क्रॉस वोटिंग?
अब तक किसी सांसद या पार्टी का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन नतीजों ने विपक्षी एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ विपक्षी नेताओं का संदेह आम आदमी पार्टी और ‘महाराष्ट्र फ्रंट’ के कुछ सदस्यों पर है। वहीं, कुछ नेता शिवसेना (यूबीटी) और राजस्थान के एक सांसद की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि, आप और शिवसेना (यूबीटी) ने इन दावों से सख्त इनकार किया है।
विपक्ष को झटका
INDIA गठबंधन को भरोसा था कि उसके उम्मीदवार रेड्डी को कम से कम 324 वोट मिलेंगे। लेकिन उन्हें केवल 300 वोट ही मिले, जिनमें से कई अवैध पाए गए। इस परिणाम ने विपक्षी एकता की असलियत उजागर कर दी है। जिससे साफ है कि उपराष्ट्रपति चुनाव सिर्फ राधाकृष्णन की जीत नहीं है, बल्कि यह भाजपा और एनडीए के लिए विपक्षी खेमे की कमजोरी दिखाने का मौका भी बन गया है। वहीं, विपक्ष के लिए यह नतीजे एक चेतावनी हैं कि गठबंधन की एकजुटता को मजबूत किए बिना आगे की राजनीति मुश्किल हो सकती है।