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Vice Presidential Election: 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है। इस बार मुकाबला एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन और इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच है। उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—के सांसदों के वोट से तय होता है। जानकारों का कहना है कि संख्याबल के लिहाज से एनडीए का पलड़ा भारी है, लेकिन क्रॉस वोटिंग इस चुनाव को दिलचस्प बना सकती है। पिछली बार भी जगदीप धनखड़ को विपक्षी दलों के सांसदों का समर्थन मिला था।
संसद में कौन है मजबूत?
राज्यसभा की बात करें तो यहां एनडीए के पास 140 सदस्य हैं, जबकि इंडिया गठबंधन के पास 91 सदस्य हैं। लोकसभा में भी भाजपा और उसके सहयोगियों की संख्या विपक्ष से कहीं ज्यादा है। ऐसे में आंकड़ों के लिहाज से सीपी राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि उपराष्ट्रपति का चुनाव गुप्त मतदान से होता है, और सांसद अपनी इच्छा के अनुसार वोट डाल सकते हैं। यही वजह है कि परिणाम घोषित होने तक किसी भी तरह का उलटफेर संभव है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह चुनाव?
जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद यह उपचुनाव कराना पड़ा। इतिहास में यह तीसरी बार है जब किसी उपराष्ट्रपति ने कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ा है। खास बात यह भी है कि पहली बार दोनों प्रमुख उम्मीदवार दक्षिण भारत से हैं—राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं, जबकि रेड्डी तेलंगाना से हैं। राधाकृष्णन का लंबा राजनीतिक और संवैधानिक अनुभव है, वे कई राज्यों के राज्यपाल रह चुके हैं और लोकसभा का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। वहीं, सुदर्शन रेड्डी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हैं और गोवा के पहले लोकायुक्त भी रह चुके हैं। यह मुकाबला न सिर्फ राजनीतिक ताकत का इम्तिहान है, बल्कि देश के दूसरे सर्वोच्च पद के लिए सांसदों की प्राथमिकता भी दिखाएगा।