VIDISHA RADHA RANI TEMPLE : मध्य प्रदेश के विदिशा स्थित नंदवाना क्षेत्र में राधा अष्टमी के मौके पर प्रसिद्ध राधा रानी मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। दोपहर 12:30 बजे महाआरती के साथ मंदिर के पट खुले तो दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच गए। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि पूरे साल में सिर्फ एक दिन आम श्रद्धालुओं को राधा रानी के प्रत्यक्ष दर्शन की अनुमति मिलती है। इसी वजह से राधा अष्टमी पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
वृंदावन से विदिशा कैसे पहुंची प्रतिमा?
मंदिर से जुड़ी परंपरा के अनुसार, मुगल शासक औरंगजेब के समय राधा रानी की प्रतिमा को वृंदावन से सुरक्षित निकालकर विदिशा लाया गया था। मंदिर के पुजारी के अनुसार उनके पूर्वज प्रतिमा को गुप्त रूप से यहां लेकर आए थे। प्रतिमा की सुरक्षा के लिए एक छोटी झोपड़ी में इसे स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की गई। इसी परंपरा के चलते आम श्रद्धालुओं के लिए साल में एक दिन दर्शन की व्यवस्था बनी, जो अब 338 वर्षों से चली आ रही है।
एक दिन के दर्शन के लिए उमड़ते हैं श्रद्धालु
मंदिर की मान्यता के चलते राधा अष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। स्थानीय बुजुर्ग महिलाओं के अनुसार वे कई दशकों से लगातार इस दिन मंदिर में दर्शन करने आती हैं। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल के भी लगातार तीन वर्षों तक यहां दर्शन करने की जानकारी दी गई है।
महाआरती के बाद खुले दर्शन
राधा अष्टमी के शुभ अवसर पर दोपहर 12:30 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। महाआरती के दौरान पूरा परिसर राधे-राधे के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू हुए। सुबह से ही मंदिर के बाहर लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। प्रशासन और मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए इंतजाम किए।