Vijay Mandir Dispute: नागपंचमी से पहले फिर से उठी पूजा की मांग। विदिशा का ऐतिहासिक विजय मंदिर एक बार फिर चर्चा में है। नागपंचमी पर्व नजदीक है और उससे पहले हिंदू संगठनों ने मंदिर का ताला खोलने और पूजा-अर्चना की अनुमति की मांग दोहराई है। सोमवार को संगठन जिले के कलेक्टर को औपचारिक आवेदन सौंपने वाले हैं। यह विवाद पिछले वर्ष भी गरमा गया था जब तत्कालीन प्रशासन ने मंदिर को 'मस्जिद' घोषित कर दिया था। उस समय भारी विरोध हुआ और बाद में प्रशासनिक फेरबदल तक हो गया। अब एक बार फिर मंदिर में पूजा की अनुमति को लेकर हलचल तेज हो गई है।
इतिहास: मंदिर बना मस्जिद, फिर उभरा पुराना स्वरूप
बताया जाता है कि विजय मंदिर का निर्माण परमार वंश के शासनकाल में 12वीं शताब्दी में हुआ था। लेकिन 18वीं शताब्दी में औरंगजेब के काल में इसे तोड़कर मस्जिद में बदल दिया गया। वर्ष 1965 में आई बाढ़ के दौरान मस्जिद की दीवारें ढह गईं और मंदिर की पुरानी संरचना सामने आई। इसके बाद इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अपने नियंत्रण में ले लिया। फिलहाल यह मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में विचाराधीन है।
मंदिर के अंदर देवी-देवताओं की मूर्तियां और शिवलिंग
विजय मंदिर की दीवारों, गर्भगृह और द्वार पर देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां अंकित हैं। मंदिर के गर्भगृह में स्पष्ट रूप से शिवलिंग भी मौजूद है। मंदिर प्रांगण में बनी संरचनाएं और वहां रखी मूर्तियां यह स्पष्ट करती हैं कि यह स्थान सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
कलेक्टर के निर्णय पर टिकी निगाहें
अब सबकी नजर वर्तमान कलेक्टर के निर्णय पर टिकी है। क्या वे हिंदू संगठनों की मांग पर विजय मंदिर का ताला खोलने की अनुमति देंगे या फिर पिछली घटनाओं की पुनरावृत्ति होगी? नागपंचमी से पहले प्रशासनिक रुख स्पष्ट हो सकता है, लेकिन जिले में माहौल फिर से गरमाता दिख रहा है।