मध्यप्रदेश की राजनीति में मंत्री विजय शाह से जुड़े मामले ने एक बार फिर हलचल बढ़ा दी है। जांच एजेंसी की रिपोर्ट में मुकदमा चलाने की सिफारिश के बावजूद सरकार अब तक अंतिम फैसला नहीं कर पाई है। मामला शीर्ष अदालत में पहुंच चुका है और सुनवाई से पहले सरकार को केवल तीन दिन के भीतर यह तय करना है कि अभियोजन की अनुमति दी जाए या नहीं। इस देरी को लेकर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है।
क्यों बना हुआ है फैसला टालने का माहौल
सूत्रों के मुताबिक, जांच दल ने अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए स्पष्ट रूप से मुकदमा चलाने की सिफारिश की थी, लेकिन राजनीतिक और कानूनी पहलुओं को लेकर सरकार असमंजस में है। राजधानी से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक इस मुद्दे पर मंथन हुआ, फिर भी किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंचा जा सका। अब जब अदालत में सुनवाई नजदीक है, तो दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
तीन दिन की समय-सीमा क्यों अहम
शीर्ष अदालत में प्रस्तावित सुनवाई से पहले सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि वह अभियोजन की अनुमति देती है या नहीं। कानूनी जानकारों का कहना है कि तय समयसीमा के भीतर निर्णय न लेने पर सरकार को अदालत के समक्ष स्थिति स्पष्ट करनी पड़ेगी। ऐसे में आने वाले तीन दिन राजनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
क्या है पूरा विवाद
पूरा मामला उस बयान से जुड़ा है, जो मंत्री विजय शाह ने मई 2025 में महू के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिया था। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान मीडिया को जानकारी देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी और मामला कानूनी मोड़ लेता चला गया।
विपक्ष का आरोप—बचाने की कोशिश
विपक्षी नेताओं का कहना है कि अदालत के निर्देशों के बावजूद सरकार कार्रवाई में देरी कर रही है। उनका आरोप है कि यदि सरकार को बयान पर आपत्ति होती तो अब तक निर्णय लिया जा चुका होता। विपक्ष इसे मंत्री को बचाने की कोशिश बता रहा है और लगातार सवाल उठा रहा है कि आखिर फैसला टालने के पीछे क्या वजह है।
आगे क्या हो सकता है
अब सबकी नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। अगर अभियोजन की अनुमति दी जाती है तो मामला अदालत में औपचारिक रूप से आगे बढ़ेगा, वहीं फैसला टलने पर राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह प्रकरण केवल राजनीतिक बहस तक सीमित रहेगा या कानूनी कार्रवाई के नए दौर में प्रवेश करेगा।