मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई विवादित टिप्पणी का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले चुका है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद बीजेपी संगठन भी सतर्क हो गया है। मामले को अब केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर देखा जा रहा है और प्रदेश संगठन को फिलहाल सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने से दूरी बनाने के निर्देश मिले हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से बढ़ा दबाव
विवादित बयान को लेकर मामला उस समय और गंभीर हो गया जब सुप्रीम Court ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। कोर्ट के कड़े रुख के बाद सरकार और संगठन दोनों पर दबाव बढ़ गया है। इस पूरे मामले पर अब राष्ट्रीय स्तर पर नजर रखी जा रही है।
एसआईटी रिपोर्ट में टिप्पणी को माना आपत्तिजनक
जांच कर रही एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में विजय शाह की टिप्पणी को आपत्तिजनक बताया गया है। जांच एजेंसी ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जांच के बाद उसे वास्तविक माना है। रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि वीडियो किसी प्रकार से एआई जनरेटेड नहीं है।
अभियोजन की अनुमति पर बना असमंजस
एसआईटी ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति सरकार से मांगी है, लेकिन अभी तक अनुमति नहीं दी गई है। इसी मुद्दे पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर असमंजस बना हुआ है। माना जा रहा है कि यदि अभियोजन की मंजूरी मिलती है तो मंत्री पद को लेकर भी दबाव बढ़ सकता है।
आदिवासी राजनीति से जुड़ा बड़ा समीकरण
विजय शाह प्रदेश की आदिवासी राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। मध्यप्रदेश की 47 अनुसूचित जनजाति सीटों में से 24 सीटें बीजेपी के पास हैं। प्रदेश की करीब 22 प्रतिशत आबादी आदिवासी वर्ग से आती है और लगभग 80 विधानसभा सीटों पर इस वर्ग का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में पार्टी इस मामले को बेहद सावधानी से संभालना चाहती है।
बीजेपी संगठन ने बनाई दूरी
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व की ओर से प्रदेश संगठन को इस मामले में किसी भी तरह की सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने से बचने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और आगे की रणनीति केंद्रीय स्तर पर तय की जाएगी।