Vijay shah case: मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विजय शाह की मुश्किलें खत्म होती नहीं दिख रहीं। कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई विवादास्पद टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां अदालत ने उन्हें माफी देने से इनकार कर दिया। भले ही कोर्ट ने उन्हें पद से हटाने की याचिका को सुनने से मना कर दिया हो, लेकिन उनके रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए आत्मचिंतन की नसीहत दी है। अब यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर गंभीर होता जा रहा है।
कोर्ट ने माफी ठुकराई, दी सख्त नसीहत
सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने विजय शाह की ओर से दी गई माफी को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मंत्री का आचरण संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। साथ ही, उन्हें सार्वजनिक जीवन में अपनी जिम्मेदारियों का आत्मचिंतन करने की सलाह भी दी। कोर्ट का यह रुख साफ करता है कि केवल औपचारिक माफी से मामले को हल नहीं किया जा सकता।
पद से हटाने की याचिका पर सुनवाई से इनकार
कांग्रेस की ओर से दायर याचिका में मांग की गई थी कि विजय शाह को संविधान के अनुच्छेद 164(3) के उल्लंघन का दोषी मानते हुए मंत्री पद से हटाया जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका सुनने से इनकार कर दिया, लेकिन मंत्री को क्लीन चिट भी नहीं दी। यह फैसला तकनीकी आधार पर लिया गया, जिससे राजनीतिक गलियारों में और बहस छिड़ गई है।
ऑपरेशन सिंदूर पर विवाद बना कारण
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब विजय शाह ने एक प्रेस ब्रीफिंग में ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणी करते हुए कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक बयान दे दिया। उस बयान को लेकर पूरे देशभर में नाराजगी देखी गई और इसे सेना के अपमान के तौर पर देखा गया। अब मामला संवैधानिक और नैतिक स्तर पर गंभीरता पकड़ चुका है।
अगली सुनवाई 13 अगस्त को
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 13 अगस्त तय की है। इस दौरान यह देखा जाएगा कि मंत्री ने अब तक क्या कदम उठाए हैं और उनका व्यवहार सुधारात्मक रहा है या नहीं। ऐसे में विजय शाह को अगली सुनवाई तक कोर्ट की निगरानी में रहना होगा।