मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई कथित विवादित टिप्पणी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई टल गई। प्रदेशभर में इस केस को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल बनी हुई है। सोमवार को शीर्ष अदालत में मामला सूचीबद्ध न होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी, जिससे राज्य सरकार के फैसले और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।
केस लिस्ट में न आने से टली सुनवाई
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई तय मानी जा रही थी, लेकिन कोर्ट की कार्यसूची में केस नंबर नहीं आने के कारण इसे सुना नहीं जा सका। इसी वजह से मंत्री विजय शाह को फिलहाल कुछ और दिनों की राहत मिल गई है। अगली तारीख के लिए अभी तक मामला आधिकारिक तौर पर सूचीबद्ध नहीं किया गया है।
पिछली सुनवाई में सरकार को मिला था समय
पिछली बार हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अहम निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा था कि मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी जाए या नहीं, इस पर सरकार दो सप्ताह के भीतर निर्णय ले। इसी समयसीमा के तहत अब प्रदेश सरकार पर दबाव बना हुआ है कि वह जल्द स्पष्ट रुख अपनाए।
SIT की चार्जशीट और अनुमति का इंतजार
मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) पहले ही अपनी चार्जशीट सौंप चुकी है। हालांकि अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार से औपचारिक मंजूरी अब तक नहीं मिली है। SIT ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया कि अनुमति मिलने के बाद ही कानूनी कार्रवाई को गति दी जा सकती है।
मंत्री की दलील सुनने से किया गया था इनकार
इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री विजय शाह की ओर से रखी गई दलीलों को सुनने से इनकार कर दिया था। साथ ही उनसे जुड़े अन्य विवादों की भी जांच SIT को सौंपने के निर्देश राज्य सरकार को दिए गए थे। इससे यह साफ हो गया था कि अदालत इस मामले को गंभीरता से देख रही है।
अगली तारीख पर टिकी प्रदेश की निगाहें
अब पूरे प्रदेश में राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक की नजरें अगली सुनवाई पर लगी हुई हैं। राज्य सरकार का फैसला, अदालत की अगली सूची और SIT की आगे की कार्रवाई—तीनों इस केस की दिशा तय करेंगे। फिलहाल सुनवाई टलने से मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।