मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए बयान को लेकर गंभीर संकट में फंस गए हैं। कानूनी मोर्चे पर राहत न मिलने और राजनीतिक स्तर पर दबाव बढ़ने के बीच अब पूरा मामला भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्णय पर आ टिका है। सरकार को 6 फरवरी तक अदालत को अपना रुख बताना है, जबकि 9 फरवरी को अगली सुनवाई प्रस्तावित है।
दिल्ली नेतृत्व के हाथों में फैसला
कर्नल सोफिया को लेकर की गई टिप्पणी के बाद उठे विवाद ने अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार और संगठन के भीतर तमाम मंथन के बावजूद अंतिम निर्णय दिल्ली नेतृत्व द्वारा ही लिया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस फैसले के आधार पर ही सरकार अदालत में अपना पक्ष रखेगी।
भोपाल से दिल्ली तक चले प्रयास
मंत्री विजय शाह ने इस पूरे मामले में भोपाल से लेकर दिल्ली तक कई स्तरों पर अपनी सफाई पेश की। राजनीतिक और संगठनात्मक मंचों पर समर्थन जुटाने की कोशिशें हुईं, लेकिन अब तक किसी भी स्तर से ठोस राहत मिलने की खबर नहीं है। देर रात तक चली चर्चाओं के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई बताई जा रही है।
अदालत के निर्देश और एसआईटी जांच
इस विवाद ने तब गंभीर रूप लिया जब हाईकोर्ट के एफआईआर दर्ज करने के आदेश को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वहां से राहत मिलने के बजाय विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन के निर्देश दिए गए। अदालत ने सरकार से अभियोजन की स्वीकृति को लेकर दो सप्ताह में निर्णय लेने को कहा है, जिससे राजनीतिक दबाव और बढ़ गया है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद दिया गया बयान
बताया जा रहा है कि इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, ऑपरेशन सिंदूर के बाद मंत्री शाह ने कर्नल सोफिया को लेकर टिप्पणी की थी, जिसे लेकर व्यापक नाराजगी सामने आई। इस बयान को लेकर सामाजिक और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं हुईं, जिसके बाद मामला कानूनी मोड़ पर पहुंच गया।
आने वाले दिनों में बढ़ेगी सियासी हलचल
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व क्या रुख अपनाता है। 6 फरवरी तक सरकार को अदालत में स्थिति स्पष्ट करनी है, जबकि 9 फरवरी को सुनवाई के दौरान अगला कदम तय होगा। माना जा रहा है कि यह फैसला न केवल मंत्री शाह के राजनीतिक भविष्य बल्कि राज्य की राजनीति की दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।