तमिलनाडु में चुनाव नतीजों के बाद अब नई सरकार के गठन की हलचल तेज हो गई है। अभिनेता से नेता बने विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम को कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद सत्ता का रास्ता काफी हद तक साफ नजर आ रहा है। इसके साथ ही टीवीके ने एआईएडीएमके की ओर से आए गठबंधन प्रस्ताव को फिलहाल होल्ड पर डाल दिया है।
कांग्रेस ने डीएमके से तोड़ा रिश्ता
लंबे समय से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी डीएमके की सहयोगी रही कांग्रेस ने अब विजय की पार्टी को समर्थन देने का फैसला किया है। कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडनकर ने कहा कि यह कदम जनता के जनादेश का सम्मान करने के लिए उठाया गया है। हालांकि कांग्रेस ने समर्थन के साथ एक शर्त भी रखी है। पार्टी ने साफ कहा है कि संविधान में भरोसा न रखने वाली सांप्रदायिक ताकतों को इस गठबंधन से दूर रखा जाए। कांग्रेस के इस फैसले के बाद तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
डीएमके ने जताई नाराजगी
कांग्रेस के इस फैसले से डीएमके नाराज नजर आ रही है। पार्टी ने इसे पीठ में छुरा घोंपने जैसा कदम बताया है। डीएमके और कांग्रेस का गठबंधन कई दशकों से अलग-अलग चरणों में बना हुआ था। अब अचानक कांग्रेस के टीवीके के साथ जाने से राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले का असर आने वाले लोकसभा और राज्यसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है।
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पहले चुनाव में टीवीके का बड़ा धमाका
4 मई को आए चुनाव नतीजों ने सभी को चौंका दिया था। पहली बार चुनाव लड़ रही विजय की पार्टी टीवीके ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीत लीं और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत है। वहीं डीएमके को 59 सीटें मिलीं जबकि अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी एआईएडीएमके 47 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को 5 सीटें मिलीं जबकि अन्य दलों का प्रदर्शन सीमित रहा।
विजय की लोकप्रियता बनी बड़ी ताकत
विजय ने पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व सीट से जीत दर्ज की। उनकी पार्टी को करीब 35 प्रतिशत वोट शेयर मिला, जिसे तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब कांग्रेस के समर्थन के बाद विजय की सरकार बनने की संभावना और मजबूत हो गई है। राज्य में आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।