Vijaya Parvati Vrat 2026: सावन का महीना आते ही शिव भक्तों में अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। इस साल सावन 30 जुलाई से शुरू हो रहा है, लेकिन उससे पहले ही श्रद्धालुओं को जया-विजया पार्वती व्रत का पावन अवसर मिलेगा। पांच दिनों तक चलने वाला यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। मान्यता है कि इसे पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है, अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है और अविवाहित कन्याओं को मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष जया-विजया पार्वती व्रत 26 जुलाई से शुरू होकर सावन कृष्ण पक्ष की तृतीया तक मनाया जाएगा।
क्यों किया जाता है जया-विजया पार्वती व्रत?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठिन तप और उपवास किए थे। उनका अटूट विश्वास, धैर्य और समर्पण ही इस व्रत की प्रेरणा माना जाता है। इसलिए विवाहित महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली और पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी की कामना के साथ इस अनुष्ठान को करती हैं। मान्यता है कि पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ इस व्रत का पालन करने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है तथा भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
पांच दिनों तक निभाए जाते हैं ये नियम
पहले दिन मिट्टी के पात्र में गेहूं या जौ बोए जाते हैं।
पांचों दिन भगवान शिव और माता पार्वती की नियमित पूजा की जाती है।
अधिकांश श्रद्धालु इस दौरान बिना नमक का सात्विक भोजन करते हैं।
फल, दूध और हल्के सात्विक आहार का सेवन किया जाता है।
अंतिम दिन रात्रि में भजन-कीर्तन, जागरण और विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।
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ऐसे करें जया-विजया पार्वती व्रत की पूजा
सुबह स्नान करने के बाद पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। घी या तेल का दीपक जलाकर कुमकुम, अक्षत, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें। जिस पात्र में गेहूं या जौ बोए गए हों, उसकी भी प्रतिदिन पूजा करें। अंत में व्रत कथा सुनें या पढ़ें और परिवार की सुख-समृद्धि, दांपत्य जीवन की खुशहाली तथा मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।
जया-विजया पार्वती व्रत की कथा
प्राचीन मान्यता के अनुसार, एक दंपति लंबे समय तक संतान सुख से वंचित था। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने उन्हें पांच दिनों तक विशेष व्रत और पूजा करने का मार्ग बताया। दंपति ने पूरे विश्वास और नियमों के साथ इस अनुष्ठान को पूरा किया। इसके बाद उन्हें संतान प्राप्ति के साथ-साथ सुख, समृद्धि और खुशहाल जीवन का आशीर्वाद मिला। तभी से इस व्रत को विशेष फलदायी माना जाने लगा।