प्रयागराज महाकुंभ से सुर्खियों में आई ‘वायरल गर्ल’ मामले में नया मोड़ सामने आया है। जांच में उसके जन्म प्रमाण पत्र को फर्जी पाया गया है, जिसे कथित तौर पर माता-पिता की मदद से तैयार किया गया था। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की जांच के बाद मामला और गंभीर हो गया है। इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक व्यवस्था और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
मां का बड़ा बयान और खुलासा
पीड़िता की मां ने बताया कि वह अनपढ़ हैं और उनसे जहां कहा गया, उन्होंने अंगूठा लगा दिया। उनका कहना है कि एक व्यक्ति घर आया और कई कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। मां के अनुसार, बेटी का जन्म अस्पताल में हुआ था, लेकिन दस्तावेजों में हेरफेर किया गया।
जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि
जांच में सामने आया कि महेश्वर नगर पालिका द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र फर्जी जानकारी के आधार पर बना था। रिकॉर्ड में लड़की का जन्म 30 दिसंबर 2009 दर्ज है, जिससे शादी के समय उसकी उम्र नाबालिग साबित हुई।
शादी और कानूनी विवाद
जानकारी के अनुसार, मार्च 2026 में केरल में विवाह हुआ था, जिसमें लड़की को बालिग बताया गया था। बाद में शिकायत मिलने पर जांच शुरू हुई और दस्तावेजों की सच्चाई सामने आई। अब विवाह पंजीयन रद्द करने की प्रक्रिया चल रही है और मामला कानूनी घेरे में आ गया है।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
जांच में यह भी सामने आया कि नगर परिषद और अस्पताल रिकॉर्ड में विरोधाभास था। अस्पताल रिकॉर्ड के अनुसार जन्म शासकीय अस्पताल में हुआ था, जबकि नगर परिषद ने “घर में जन्म” का प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इस पर अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
एफआईआर और आगे की कार्रवाई
मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आरोपियों पर पॉक्सो एक्ट व बाल विवाह निषेध कानून के तहत कार्रवाई तय मानी जा रही है। पुलिस अब बिचौलियों और दस्तावेज बनाने वालों की भूमिका की भी जांच कर रही है।