प्रयागराज महाकुंभ में वायरल होकर सुर्खियों में आई मोनालिसा अब एक बड़े कानूनी और आपराधिक मामले के केंद्र में है। राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की जांच में उसकी उम्र को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसमें वह नाबालिग पाई गई है। इस खुलासे के बाद शादी, अपहरण और पॉक्सो जैसे गंभीर आरोपों ने पूरे मामले को संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल बना दिया है।
शिकायत से शुरू हुई जांच, आयोग ने बनाया जांच दल
मामले की शुरुआत एक सामाजिक शिकायत से हुई। उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रथम दुबे ने राष्ट्रीय जनजातीय आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य से इस पूरे प्रकरण की जांच की मांग की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए 17 मार्च को आयोग ने एक विशेष जांच दल गठित किया, जिसने पूरे मामले की पड़ताल शुरू की।
जन्म रिकॉर्ड ने खोला राज, नाबालिग साबित हुई मोनालिसा
जांच के दौरान सबसे अहम सबूत महेश्वर के शासकीय अस्पताल का रिकॉर्ड रहा। दस्तावेजों के अनुसार मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को शाम 5:50 बजे हुआ था। इस आधार पर आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि मोनालिसा अभी बालिग नहीं है। यह तथ्य सामने आते ही पूरे मामले की दिशा बदल गई।
शादी के नाम पर साजिश? युवक पर गंभीर आरोप
मोनालिसा के केरल निवासी मुस्लिम युवक से विवाह की खबर पहले ही चर्चा में थी, लेकिन अब यह मामला संदेह के घेरे में आ गया है। पुलिस ने FIR अपडेट करते हुए युवक फरमान खान पर अपहरण, शादी का झांसा देने और पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर धाराएं जोड़ दी हैं। इससे यह मामला एक संगठित साजिश की आशंका की ओर इशारा कर रहा है।
परिवार की शिकायत और पुलिस कार्रवाई तेज
मोनालिसा के पिता जयसिंह भोंसले ने महेश्वर थाने में 25 मार्च को अपहरण का मामला दर्ज कराया था। जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने केस को और मजबूत किया है। अब पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है, जिसमें लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने की आशंका भी शामिल है।
बयानबाजी और बढ़ती सियासी-सामाजिक हलचल
इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता सनोज मिश्रा ने भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने आ गई है और मोनालिसा के नाबालिग होने की पुष्टि हो चुकी है। इस खुलासे के बाद मामला अब केवल एक वायरल कहानी नहीं, बल्कि एक गंभीर आपराधिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।