विराट कोहली को क्रिकेट जगत में रन मशीन कहा जाता है। वनडे क्रिकेट में उनके नाम 54 शतक दर्ज हैं और ज्यादातर मौकों पर उनका शतक भारत की जीत की गारंटी बनता है। लेकिन क्रिकेट टीम गेम है और यही वजह है कि कुछ मैचों में कोहली का शानदार प्रदर्शन भी टीम को हार से नहीं बचा सका। आंकड़े बताते हैं कि अब तक 9 ऐसे वनडे मैच हुए हैं, जहां कोहली ने शतक लगाया, लेकिन इसके बावजूद भारत को हार झेलनी पड़ी।
साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड की ताजा हार
हाल ही में यह तस्वीर फिर देखने को मिली। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे वनडे में विराट कोहली ने 102 रन बनाए और भारत ने 359 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। इसके बावजूद भारतीय गेंदबाज उस लक्ष्य का बचाव नहीं कर सके और टीम को 4 विकेट से हार मिली। इसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में कोहली ने 124 रनों की शानदार पारी खेली, लेकिन 338 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत 41 रन से हार गया।
पहला शतक और पहली निराशा
विराट कोहली के करियर का पहला वनडे शतक साल 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ आया था। उस मैच में उन्होंने 107 रन बनाए, लेकिन डकवर्थ लुईस नियम के तहत भारत को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2014 में न्यूजीलैंड के खिलाफ नेपियर वनडे में कोहली ने 123 रन की जुझारू पारी खेली, लेकिन मध्यक्रम के फ्लॉप होने से टीम 24 रन से हार गई।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेकार गए शतक
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विराट कोहली का रिकॉर्ड शानदार रहा है, लेकिन यहां भी कुछ मैचों में उनके शतक जीत नहीं दिला सके। साल 2016 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उन्होंने लगातार दो मैचों में 117 और 106 रन बनाए, फिर भी भारत को हार झेलनी पड़ी। 2019 में रांची वनडे में कोहली के 123 रन भी ऑस्ट्रेलिया को जीतने से नहीं रोक सके।
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न्यूजीलैंड और वेस्टइंडीज की कहानी
साल 2017 में मुंबई में अपने 200वें वनडे मैच में विराट कोहली ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 121 रन बनाए। इसके बावजूद टॉम लैथम और रॉस टेलर की साझेदारी ने भारत से मैच छीन लिया। वहीं 2018 में पुणे में वेस्टइंडीज के खिलाफ कोहली के 107 रन भी बेकार गए और भारत को 43 रन से हार मिली।
शतक काफी नहीं, टीम का साथ जरूरी
इन 9 मैचों से साफ होता है कि विराट कोहली ने हर बड़े विरोधी के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उनकी निरंतरता पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन जीत के लिए टीम का सामूहिक प्रदर्शन जरूरी होता है। गेंदबाजी और फील्डिंग में चूक कई बार कोहली की शानदार पारियों पर भारी पड़ी। ये मैच भले ही हार में बदले हों, लेकिन कोहली की मेहनत और प्रतिबद्धता को पूरी तरह साबित करते हैं।