कर्नाटक सरकार ने RCB, KSCA और DNA नेटवर्क्स पर आपराधिक मामला दर्ज किया है. जस्टिस डी’कुन्हा रिपोर्ट में हुए खुलासे ने क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर दिया है
बेंगलुरु की सड़कों पर जश्न का रंग ऐसा बिखरा कि अफरा-तफरी में मातम बदल गया. RCB की ऐतिहासिक जीत के बाद आयोजित की गई 'विक्ट्री परेड' अब कानूनी संकट बन चुकी है. दरअसल खबर है कि कर्नाटक सरकार ने RCB (रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर), KSCA (कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ) और DNA Networks Pvt. Ltd. के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी दे दी है. इस कार्रवाई की नींव जस्टिस माइकल डी'कुन्हा आयोग की रिपोर्ट ने खी. जिसने इस पूरे आयोजन में हुई वित्तीय अनियमितताओं, प्रशासनिक विफलताओं और गंभीर लापरवाही की पोल खोल दी. रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला नाम सामने आया विराट कोहली का, जिन्होंने एक वीडियो जारी कर फैंस से मुफ्त में परेड में आने की अपील की थी.
करीब 3 लाख लोग परेड में आए- रिपोर्ट
बिना अनुमति के प्रचार, इवेंट की सही सूचना न होना, सोशल मीडिया पर फ्री एंट्री के प्रचार और गेट खोलने में हुई देरी ने माहौल को और बिगाड़ा. रिपोर्ट के अनुसार, करीब 3 लाख से अधिक लोग इस परेड में उमड़ पड़े और जब स्टेडियम में एंट्री के लिए पास की घोषणा हुई, तो भीड़ बेकाबू हो गई, भगदड़ मच गई. घटनास्थल पर अफरा-तफरी इतनी थी कि 7 पुलिसकर्मी घायल हो गए. यही नहीं, DNA Networks ने 2009 के नियमों के मुताबिक पुलिस से आवश्यक मंजूरी नहीं ली, सिर्फ एक दिन पहले सूचना भर दी गई थी. बावजूद इसके, RCB ने पूरे जोर-शोर से सोशल मीडिया पर प्रचार किया.
सरकार की सख्ती से सब हैरान
अब सरकार की सख्ती से इन सभी संस्थाओं की जवाबदेही तय की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसे आयोजन अव्यवस्था की भेंट न चढ़ें. सवाल अब विराट कोहली से लेकर पूरी RCB मैनेजमेंट पर उठ रहा है क्या जीत का जश्न इस कीमत पर मनाना चाहिए था?